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पूर्व सीएम एमके स्टालिन का बड़ा दावा: कहा- तमिलनाडु में टीवीके सरकार पर संकट, तीन महीने भी चलना मुश्किल

Sun, 07 Jun 2026 06:44 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, चेन्नई।

सार

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार तीन महीने भी नहीं टिक पाएगी। छह दशक बाद बनी इस गैर-द्रमुक और गैर-अन्नाद्रमुक सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनने के आसार हैं।
 
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एमके स्टालिन, पूर्व सीएम, तमिलनाडु - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु की राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य की नई टीवीके सरकार तीन महीने भी नहीं चल पाएगी। मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय के नेतृत्व वाली यह सरकार शुरुआत से ही चौतरफा घिरी हुई है। इस बयान के बाद राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
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ऐतिहासिक बदलाव और छह दशक का रिकॉर्ड
तमिलनाडु में इसी साल मई के महीने में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला था। अभिनेता से नेता बने सी. जोसफ विजय ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पिछले 60 साल में यह पहली बार हुआ है जब तमिलनाडु में द्रमुक (डीएमके) या अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) से इतर किसी तीसरे दल की सरकार बनी है। इस बड़े बदलाव के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे एक नए युग की शुरुआत मान रहे थे। लेकिन विपक्षी दलों का सोचना इससे बिल्कुल अलग है।

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पूर्व सीएम स्टालिन ने क्या-क्या कहा? 
चेन्नई में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला। दरअसल, यह कार्यक्रम विदुथलाई चिरुथाईगल काची के पूर्व विधायक पनैयूर बाबू और उनके समर्थकों को द्रमुक में शामिल कराने के लिए आयोजित किया गया था।

नेताओं का पार्टी में स्वागत करते हुए स्टालिन ने कहा कि जब यह सरकार सत्ता में आई थी, तब मैंने कहा था कि मैं छह महीने तक इसकी आलोचना नहीं करूंगा। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। अब ऐसा डर सताने लगा है कि मुझे अपने तय समय से पहले ही बोलना पड़ेगा। स्टालिन ने सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच इस सरकार को लेकर भारी असंतोष है। आलोचनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब सवाल छह, पांच या चार महीनों का नहीं रह गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सरकार तीन महीने भी टिक पाएगी।
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कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ
अपने इस तीखे राजनीतिक हमले के बीच एमके स्टालिन ने अपनी पार्टी के नए कार्यकर्ताओं को अनुशासन की सीख भी दी। उन्होंने दल-बदल कर आए नेताओं से साफ कहा कि वे अपनी पुरानी पार्टी की बुराई न करें। उन्होंने द्रमुक के संस्थापक सीएन अन्नादुरई के एक प्रसिद्ध कथन का जिक्र किया। स्टालिन ने कहा कि अन्ना ने हमेशा सिखाया है कि विरोधी के बगीचे के चमेली के फूल में भी खुशबू होती है। इसलिए राजनीति में किसी को भी कमतर आंकने की जरूरत नहीं है। उन्होंने नए कार्यकर्ताओं से पार्टी को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
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