तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही द्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। दोनों दल अभी साथ हैं, लेकिन नेताओं के ताजा बयानों ने अंदरूनी तनाव को उजागर कर दिया है। मामला सिर्फ सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार में हिस्सेदारी के सवाल पर भी टकराव दिख रहा है। इससे चुनाव से पहले गठबंधन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
मंत्री के बयान से शुरू हुआ नया विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब तमिलनाडु सरकार में मंत्री राजा कन्नप्पन ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि द्रमुक अगले विधानसभा चुनाव में 160 से 170 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और करीब 160 सीटें जीतने को लेकर भरोसे में है। इस बयान को कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया पर उठाया और सवाल किया। उन्होंने लिखा कि 2021 में द्रमुक ने 173 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 133 सीटें जीती थीं, इसलिए जिन सीटों पर हार मिली, उनका हिसाब भी जरूरी है।
कांग्रेस ने सत्ता में हिस्सेदारी को बताया अधिकार
मणिकम टैगोर ने साफ कहा कि सत्ता में भागीदारी जरूरी है और यह कांग्रेस का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जनता तय करेगी कि सरकार गठबंधन की बनेगी या एक दल की। उनका बयान ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार में कांग्रेस को मंत्री पद मिलने की चर्चाएं लगातार चलती रही हैं। कांग्रेस के कुछ नेता लंबे समय से सरकार में औपचारिक भागीदारी की मांग उठा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री स्टालिन ने गठबंधन सरकार से किया इनकार
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि तमिलनाडु में गठबंधन सरकार की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन सरकार में सत्ता साझेदारी का प्रावधान नहीं होगा। इस बयान के बाद कांग्रेस खेमे में नाराजगी की चर्चा तेज हुई। इसे कांग्रेस नेताओं की मंत्री पद की उम्मीदों पर सीधा ब्रेक माना गया।
2006 के चुनाव का उदाहरण देकर पलटवार
स्टालिन के बयान के बाद टैगोर ने फिर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जनता ही तय करेगी कि सरकार का स्वरूप क्या होगा। उन्होंने 2006 के विधानसभा चुनाव का उदाहरण दिया, जब द्रमुक को 96 और कांग्रेस को 34 सीटें मिली थीं। उस समय पूर्ण बहुमत न होने पर गठबंधन के आधार पर सरकार बनी थी। टैगोर का संकेत था कि तब कांग्रेस को ज्यादा मजबूत सत्ता साझेदारी पर जोर देना चाहिए था।
रिश्ता मजबूत बताने की कोशिश, पर सवाल बरकरार
मुख्यमंत्री स्टालिन ने बाद में कहा कि द्रमुक-कांग्रेस संबंध मजबूत हैं और कुछ लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें और राहुल गांधी को इस रिश्ते पर कोई चिंता नहीं है। इस पर टैगोर ने पलटकर कहा कि अगर लोग शासन में हिस्सेदारी मांगते हैं तो उसे साजिश नहीं कहा जा सकता। चुनावी माहौल गरम होने के साथ सीट बंटवारे और सत्ता हिस्सेदारी का मुद्दा गठबंधन के भीतर बड़ा राजनीतिक प्रश्न बन गया है।
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