तमिलनाडु के विपक्षी दल अन्नाद्रमुक के ईके पलानीस्वामी और ओ पनीरसेल्वम गुटों के बीच लड़ाई थम नहीं रही है। दोनों ने पार्टी की साधारण सभा की बैठक के बाद एक-दूसरे के समर्थकों को निष्कासित करने की होड़ शुरू कर दी है। अब तक 100 से अधिक सदस्य बर्खास्त किए जा चुके हैं।
11 जुलाई को हुई अन्नाद्रमुक बैठक में पलानीस्वामी को पार्टी का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया था और पनीरसेल्वम को निष्कासित कर दिया था। पलानीस्वामी ने एक तरह से पार्टी पर कब्जा कर लिया है। अब उन्होंने पनीरसेल्वम के 21 समर्थकों को पार्टी से निकाल दिया है। पूर्व सीएम ने अब तक 39 समर्थकों को निष्कासित कर दिया है। इन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया है।
मद्रास हाईकोर्ट से भी लगा था पनीरसेल्वम को झटका
दरअसल, अन्नाद्रमुक में वर्चस्व की जंग चल रही है। हालांकि, इसमें पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम कमजोर नजर आ रहे हैं। उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से भी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक की मंजूरी दे दी थी। इसके बाद हुई बैठक में पलानीस्वामी को पार्टी का अंतरिम महासचिव चुन लिया गया। पनीरसेल्वम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और कोषाध्यक्ष के पद से भी निष्कासित किया जा चुका है। इसके बाद पनीरसेल्वम समर्थकों ने जमकर तोड़फोड़ की थी।
द्रमुक सरकार का पक्ष ले रहे पनीरसेल्वम
अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता केपी मुनुसामी ने बीते दिनों आरोप लगाया था कि पार्टी कोषाध्यक्ष ओ. पनीरसेल्वम ने सत्तारूढ़ द्रमुक से नजदीकी बना ली है। अब उनके साथ किसी भी तरह का संबंध रखना असंभव है। मुनुसामी ने कहा कि पनीरसेल्वम द्रमुक शासन का पक्ष ले रहे हैं और जब वह सत्तारूढ़ दल की प्रशंसा करेंगे तो इससे अलगाव की स्थिति उत्पन्न होगी ही।