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तमिलनाडु: नवोदय विद्यालय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हिंदी भाषा विवाद पर विजय सरकार को लगाई फटकार; क्या है मामला?

Thu, 17 Sep 2026 07:08 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दिसंबर 2025 के अपने आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। अदालत ने हर जिले में स्कूल के लिए जरूरी जमीन चिन्हित करने को कहा। केंद्र-राज्य सहयोग पर भी जोर दिया। आइए, जानते ये विवाद क्या है? राज्य की भाषा नीति पर क्या आपत्ति है? अदालत ने जमीन को लेकर क्या निर्देश दिए है?
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नवोदय विद्यालय पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से क्या कहा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार को राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए जरूरी जमीन चिन्हित करने के अपने दिसंबर 2025 के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग जरूरी है। अदालत ने सवाल किया कि अगर समवर्ती सूची में केंद्र सरकार कोई नीति लेकर आती है और हर राज्य यह कहने लगे कि वह उसे स्वीकार नहीं करता, तो संघीय व्यवस्था कैसे चलेगी। पीठ ने तमिलनाडु सरकार से इस मामले में अपना नजरिया बदलने को भी कहा।

दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?

15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए जरूरी जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया था। 

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गुरुवार को तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने बताया कि राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल किया है। 
इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि वह 15 दिसंबर 2025 के आदेश को वापस नहीं ले रही है। हालांकि, अदालत ने अब राज्य सरकार को जमीन चिन्हित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है। यह निर्देश राज्य की विशेष अनुमति याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।

नवोदय विद्यालयों को लेकर तमिलनाडु की आपत्ति क्या है?

तमिलनाडु सरकार ने राज्य में नवोदय विद्यालय स्थापित करने का विरोध मुख्य रूप से इन स्कूलों में लागू तीन-भाषा नीति वाले पाठ्यक्रम को लेकर किया है। सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य के वकील से कहा कि यदि राज्य यह कहता है कि वह तमिलनाडु की जमीन पर हिंदी पढ़ाए जाने के कारण नवोदय विद्यालय नहीं चाहता, तो पहले अपना नजरिया बदलना होगा। इस पर जयदीप गुप्ता ने कहा कि तमिलनाडु सरकार हिंदी की पढ़ाई का बिल्कुल विरोध नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल पहले से मौजूद हैं, जहां हिंदी पढ़ाई जाती है।

केंद्र सरकार ने जमीन और खर्च को लेकर क्या कहा?

  • केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि तमिलनाडु सरकार के लिए मुख्य आवश्यकता केवल जमीन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बाकी सभी व्यवस्थाओं का ध्यान केंद्र सरकार रखेगी और इससे राज्य सरकार पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा। 
  • भाषा नीति से जुड़े मुद्दे पर भी बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य दोनों से बातचीत करने और इस मामले को मिलकर सुलझाने को कहा। पीठ ने कहा कि चेन्नई को दिल्ली से अलग नहीं होना चाहिए और दिल्ली को भी चेन्नई से अलग नहीं होना चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।

 

यह मामला मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

नवोदय विद्यालयों की स्थापना का विवाद पहले मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा था। सितंबर 2017 में हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया में मदद करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य की ओर से नवोदय विद्यालयों को अनुमति नहीं देने से छात्रों के अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान चुनने के अधिकार पर असर पड़ता है। अदालत ने इसे 2009 के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून के अनुरूप नहीं माना था। तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद 11 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी थी।

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