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तमिलनाडु भगदड़ : 'यह बड़ी मानव जनित त्रासदी, नेता भी भाग खड़े हुए'; हाईकोर्ट की विजय की पार्टी को फटकार

Fri, 03 Oct 2025 03:48 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने शुक्रवार को नमक्कल के एक टीवीके पदाधिकारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। टीवीके नेता पर एक निजी अस्पताल पर हमले का आरोप है।
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : एक्स (ट्विटर)
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को करूर रैली में हुई भगदड़ को लेकर अभिनेता से नेता बने विजय और उनके संगठन, तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस एन सेंथिलकुमार ने कहा कि पार्टी प्रमुख विजय घटनास्थल से भाग निकले और वहां मदद करने के लिए कोई नहीं रुका। उन्होंने इसे पार्टी का लापरवाह आचरण बताते हुए कहा कि उसके नेता की ओर से खेद तक नहीं जताया गया।

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अदालत ने इस तरह के आचरण की कड़ी निंदा की, खासकर जब महिलाओं और बच्चों की मौत हुई हो। हाईकोर्ट ने कहा कि इससे अभिनेता-राजनेता और उनकी मानसिक स्थिति को दर्शाता है। साथ ही अदालत ने रैली के दौरान हुई भगदड़ की जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी असरा गर्ग के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया।

जस्टिस सेंथिलकुमार ने कहा कि ऐसी भगदड़, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई, को ठीक से नहीं संभाला गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य विजय के प्रति नरमी बरत रहा है।न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार ने कहा, एक इंसान होने के नाते, मैं इन मौतों पर शोक व्यक्त करता हूं। एक न्यायाधीश होने के नाते, इतनी सारी जानें जाते देखना बहुत कष्टदायक है। उन्होंने कहा, आपने क्या कार्रवाई की? आपने ऐसा होने दिया, और अब कहते हैं कि केवल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कौन जिम्मेदार है?
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विजय के त्रासदी से निपटने के तरीके और तमिलनाडु सरकार की नरम प्रतिक्रिया को देखते हुए हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की। हालांकि राज्य ने अब तक पुलिस मामलों में स्थानीय जिला सचिवों को नामजद किया है और सुपरस्टार के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने से परहेज किया है, लेकिन अदालत ने इस पर सीधा सवाल उठाया। न्यायाधीश ने राज्य के सरकारी वकील हसन मोहम्मद जिन्ना से पूछा, करूर भगदड़ पर एफआईआर दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई करने से आपको क्या रोक रहा है?
 
विजय के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करने पर कहा- अदालत के समक्ष सभी बराबर
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील जी शंकरन ने कहा कि विजय के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। न्यायाधीश ने राज्य के विधि अधिकारी की ओर रुख किया और याद दिलाया कि कानून के सामने सभी समान हैं। इसके कुछ ही मिनटों बाद हाईकोर्ट ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश जारी कर दिया।

 पुलिस जवाबदेही तय नहीं करेगी, तो कौन करेगा
सरकारी वकील एस संतोष ने अदालत को बताया कि जिला सचिव समेत टीवीके के पदाधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं का विरोध किया। लेकिन अदालत इससे सहमत नहीं हुई। जस्टिस सेंथिलकुमार ने पूछा, अगर पुलिस जवाबदेही तय नहीं करेगी, तो जवाबदेही कौन तय करेगा? 

दिशानिर्देश तय होने तक राजमार्गों पर रोड शो, रैलियों पर रोक
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रदेश में राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर राजनीतिक रैलियों, रोड शो और इसी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रमों पर तब तक रोक लगा दी जब तक कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार नहीं हो जाती।

यह आदेश चार जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया, जिसमें हाल ही में करूर भगदड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक आयोजनों के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि जब तक एसओपी को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक वह राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्धारित स्थानों को छोड़कर किसी भी सभा की अनुमति नहीं देगी। 

हाईकोर्ट ने भाजपा नेता को मदुरै पीठ जाने को कहा
याचिका में कहा गया कि इस घातक घटना के पीछे सरकारी उदासीनता सहित कई सवाल हैं। शुक्रवार को एक खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया क्योंकि यह मदुरै पीठ के न्यायाधिकार का मामला है। 

उच्च न्यायालय ने टीवीके नेताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने शुक्रवार को नमक्कल के एक टीवीके पदाधिकारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। टीवीके नेता पर एक निजी अस्पताल पर हमले का आरोप है। टीवीके के नमक्कल (पश्चिमी तमिलनाडु) जिला सचिव सतीश कुमार ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। 27 सितंबर को विजय की रैली के दौरान अस्पताल पर हुए हमले से टीवीके नेता सतीश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और गिरफ्तारी के डर से उन्होंने अदालत का रुख किया। इस मामले में देर रात आए अपडेट के मुताबिक पार्टी में संयुक्त सचिव पद संभालने वाले नेता सीटीआर निर्मल कुमार की याचिका भी खारिज हो गई।
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