लोकसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। इस बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ दल डीएमके मजबूत दिख रही है। डीएमके ने कांग्रेस सहित गठबंधन में शामिल अन्य दलों के साथ सीट साझेदारी पर भी अंतिम मुहर लगा दी है। महिला वोटरों को लुभाने के लिए डीएमके ने विधानसभा चुनावों की तरह ही महिलाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह सहायता राशि देने की योजना को जारी रखा है। हालांकि, यहां इस बार भाजपा भी नए जोश में है। भाजपा भी यहां जी-जान से मेहनत कर रही है।
ऐसे में अब लोकसभा चुनाव से पहले यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि डीएमके की आखिर ताकत है और उनकी कमजोरी क्या है:-
पार्टी की यह है ताकत:
- पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन का सीएए सहित अन्य मुद्दों पर कट्टर भाजपा विरोधी रुख।
- सत्तारूढ़ डीएमके की लोकप्रियता कमोबेश बरकरार है।
- डीएमके राज्य भर में बहुत मजबूत है।
- कांग्रेस और वाम दलों सहित DMK के सहयोगियों का पूर्ण समर्थन।
पार्टी की यह है कमजोरी:
- 'परिवार शासन' और 'वंशवाद' की राजनीति, यह आरोप अक्सर अन्नाद्रमुक और भाजपा द्वारा लगाया जाता है।
- डीएमके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप।
- पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी के खिलाफ ईडी का मामला दर्ज है और वह अब भी जेल में हैं।
- राजस्व मंत्री केकेएसएसआर रामचंद्रन और वित्त मंत्री थंगम थेनारासु के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप।
- अन्नाद्रमुक बार-बार द्रमुक पर निशाना साधते हुए आरोप लगा रही है कि उसने मेकेदातु मुद्दे में टीएन के अधिकारों को सुरक्षित नहीं किया।
पार्टी के लिए यह है अवसर
- महिलाओं के लिए सरकारी बसों में किराया-मुक्त यात्रा सहित कल्याणकारी उपायों का कार्यान्वयन
- अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना।
- मुक्कुलाथोर समुदाय से आने वाले नेता ओ पन्नीरसेल्वम एआईएडीएमके से बाहर हैं।
पार्टी के लिए यह है डर
- एडप्पादी के पलानीस्वामी के नेतृत्व में एआईएडीएमके अच्छी तरह से संगठित है और राज्य भर में एक वास्तविक शक्ति है।
- एआईएडीएमके अपने चुनावी आश्वासनों को लेकर डीएमके पर लगातार निशाना साध रही है।
- एआईएडीएमके ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया और डीएमके से मुकाबला करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
- डीएमके के खिलाफ बीजेपी का 'परिवार शासन' और 'भ्रष्टाचार के आरोप' का अभियान।