तमिलनाडु के मदुरै जिले के उसिलमपट्टी में 16 वर्षीय दलित छात्रा की मौत के मामले में पुलिस ने सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में प्राथमिकी में नामजद किया है। छात्रा 24 अगस्त को अपनी मां के साथ कक्षा 11 में दाखिले के लिए स्कूल पहुंची थी। आरोप है कि वहां कथित अपमान और जातिसूचक टिप्पणी के बाद वह बेहद परेशान हो गई और अगले दिन उसकी मौत हो गई। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि इस मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून की धाराएं लगाई जाएंगी या नहीं।
पहले आत्महत्या का मामला था, अब प्रधानाध्यापिका नामजद
मदुरै पुलिस ने 25 अगस्त को छात्रा की मौत के बाद दर्ज की गई अस्वाभाविक मौत के केस को 28 अगस्त को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बदल दिया। सरकारी मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उसिलमपट्टी की प्रधानाध्यापिका का नाम प्राथमिकी में शामिल किया गया है।
छात्रा की मां की शिकायत के मुताबिक, 24 अगस्त को वह अपनी बेटी के साथ दाखिले के लिए स्कूल गई थीं। छात्रा पहले जिस स्कूल में पढ़ रही थी, वहां पढ़ाई छोड़कर वह नर्सिंग की पढ़ाई करना चाहती थी। इसी वजह से परिवार नए स्कूल में दाखिले की कोशिश कर रहा था। दाखिले के दौरान छात्रा की मां प्रधानाध्यापिका के सामने हाथ जोड़कर खड़ी थीं। छात्रा ने अपनी मां के हाथ नीचे करने का इशारा किया। आरोप है कि प्रधानाध्यापिका इस बात से नाराज हो गईं और छात्रा को घमंडी कहते हुए कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी की। इसके बाद दोनों को स्कूल से जाने के लिए कहा गया।
विवाद के अगले ही दिन ही छात्रा की मौत
परिजनों के मुताबिक, स्कूल से लौटने के बाद छात्रा काफी परेशान थी। उसकी मां ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि बेटी ने उस रात खाना नहीं खाया और काफी देर तक दुखी रही। पुलिस के मुताबिक, 25 अगस्त को छात्रा की घर पर मौत हो गई। इसके बाद शुरुआत में आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था। घटना और छात्रा की स्थिति को लेकर परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की धाराएं बदल दीं और प्रधानाध्यापिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में नामजद किया।
यहां एक अहम बात यह है कि प्रधानाध्यापिका पर लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। शिक्षा विभाग की ओर से की गई पूछताछ में प्रधानाध्यापिका ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि बातचीत सामान्य तरीके से हुई थी और उनकी कोई जातिगत मंशा नहीं थी। जांच की रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी गई है।
यह भी पढ़ें: एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन: एवरेस्ट हींग बिक्री पर लगाई रोक, जांच में सामने आईं कई गड़बड़ियां
अब जाति कानून पर क्यों टिकी नजर?
मामले में अगला बड़ा सवाल अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून को लेकर है। पुलिस ने बताया है कि वह इस पहलू की भी जांच कर रही है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस कानून की धाराएं लगती हैं या नहीं। पुलिस स्कूल की निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी हासिल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कक्षा या उस कमरे के अंदर की बातचीत कैमरे में दर्ज नहीं हुई है। स्कूल के बाहर की गतिविधियों से जुड़ी रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है।
जिला बाल कल्याण समिति और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मामले की जांच कर रहे हैं। यानी अब जांच का केंद्र सिर्फ छात्रा की मौत नहीं, बल्कि स्कूल में दाखिले के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और प्रधानाध्यापिका की भूमिका क्या थी, इस पर भी है।
दाखिले के लिए स्कूल क्यों बदला था?
छात्रा ने पहले कक्षा 10 की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने एक सरकारी स्कूल में दाखिला लिया था, लेकिन नर्सिंग से जुड़ा विषय पढ़ने की इच्छा के कारण वहां पढ़ाई जारी नहीं रखी। परिवार ने बाद में उसिलमपट्टी के एक सहायता प्राप्त स्कूल में दाखिले की कोशिश की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वहां पांच हजार रुपये की राशि मांगी गई थी, जिसे परिवार तत्काल नहीं दे सका। इसके बाद परिवार सरकारी मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचा।