मुथुरामलिंगम ने कहा कि उप-निरीक्षक श्रीकुमार के खिलाफ सथानकुलम पुलिस स्टेशन में धारा 302 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद आरडीओ ने अपनी जांच शुरू की। आरडीओ ने सब-इंस्पेक्टर काला और स्टेशन से छह कांस्टेबल का नाम क्यों नहीं बताया? सभी आठ पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया जाना चाहिए था, अदालत ने अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चार्जशीट में उन्हें शामिल करने के लिए साक्ष्य नहीं हैं।
भरथ की मृत्यु के एक साल बाद उसकी मां की मौत हो गई। नवंबर 2009 में विजय की आत्महत्या से मृत्यु हो गई। शेष परिवार भाई राजेश विनोद और पिता, डेविड इंगराज क्रमशः इरोड और चेन्नई में रहते हैं और काम करते हैं।
पिता-पुत्र की ‘हिरासत में मौत का मामला
पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने की वजह से जे बेनिक्स और उसके पिता आर पी जयराज की क्रमश: 20 और 23 जून को मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देश में एक बार फिर पुलिस सुधारों की मांग ने जोर पकड़ा, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए। आरोप है कि सथानकुलम पुलिस द्वारा बेनिक्स और जयराज दोनों को कोविड-19 की वजह से लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
इन पर अपनी मोबाइल की दुकान तय समय के बाद भी खुला रखने का आरोप था। घटना की जांच कर रहे न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया था कि पुलिसकर्मियों ने पुलिस थाने में पूरी रात पिता-पुत्र की लाठी से पिटाई की थी और खून के धब्बों वाली एक टेबल इसका सबूत है। उच्च न्यायालय ने पूर्व में कहा था कि सथानकुलम पुलिस थाने के कर्मियों ने साक्ष्य मिटाने के प्रयास किए। न्यायमूर्ति पी एन प्रकाश और बी पुगालेंधी ने जांच सीबी-सीआईडी को सौंपते हुए कहा था कि पुलिसकर्मी इतने बेखौफ थे कि उन्होंने पुलिस थाने में जांच के दौरान मजिस्ट्रेट को भी धमकाया। इस मामले में एक निरीक्षक समेत अब तक पांच पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।