तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर टीटीवी दिनाकरन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और डीएमके को हराने की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सीट-बंटवारे पर बातचीत नहीं हुई, लेकिन यह अगले दो-तीन दिनों में चेन्नई में तय किया जाएगा। पढ़िए रिपोर्ट-
तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) पार्टी के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने शनिवार को जानकारी दी कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को हराने की रणनीति पर चर्चा की।
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सीट बंटवारे पर दिनाकरन ने क्या कहा?
टीटीवी दिनाकरन ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ के साथ बैठक में सीट-बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने (अमित शाह) यह बात की कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दल 234 विधानसभा क्षेत्रों में एकजुट होकर काम करें। चुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित करें।'
दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई?
पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिनाकरन ने कहा, उन्होंने कुछ निर्देश दिए हैं और सलाह दी है। मैं इसी मकसद से यहां (नई दिल्ली) आया था। दिनाकरन ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मुख्य रूप से यही चर्चा करने के लिए मुलाकात की और सीट बंटवारा अगले दो-तीन दिनों में सौहार्दपूर्ण तरीके से चेन्नई में तय किया जाएगा। एएमएमके प्रमुख ने कहा, हम भ्रष्ट डीएमके सरकार के खिलाफ लड़ेंगे। लोग हमारे साथ हैं। हम निश्चित रूप से जीत हासिल करेंगे और तमिलनाडु में एआईएडीएमके के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाएंगे।
बार-बार दिल्ली आने के सवाल पर क्या कहा?
दिनाकरन से जब मीडिया ने पूछा, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने यह आलोचना की थी कि पल्लानीस्वामी बार-बार दिल्ली जाते हैं और भाजपा नेताओं से बातचीत करते हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव तमिलनाडु की स्थानीय टीम और दिल्ली की टीम के बीच की लड़ाई बन गया है। इस पर टीटीवी धनकरन ने सवाल किया, क्यों, क्या आपको हमारे दिल्ली आने से कोई दिक्कत है?
उन्होंने कहा, डीएमके क्या कहता है,आप वही क्यों दोहराना चाहते हैं। हमें पता है कि उन्होंने पहले दिल्ली में क्या किया। स्टालिन चुनाव में हार के डर से यह बात कर रहे हैं कि यह तमिलनाडु टीम बनाम दिल्ली टीम है। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स में कई गैर-तमिल खिलाड़ी हैं, जिनमें कप्तान भी शामिल है। मुख्यमंत्री इसका क्यों विरोध नहीं करते?