तमिलनाडु के सिवाकासी में एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसे सरकारी अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की वजह से एचआईवी हो गया। अब अक और महिला आगे आई है और उसका दावा है कि वह इस वायरस के संपर्क में तब आई जब वह गर्भवती थी और चेन्नई के किलपौक मेडिकल कॉलेज (केएमसी) में उसका ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ। हालांकि केएमसी प्रशासन का कहना है कि वह इस दावे को 99 प्रतिशत खारिज करते हैं।
प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अप्रैल में महिला को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए खून देने वाले दोनों डोनर का टेस्ट किया था। जन्म के बाद हुई शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला का बच्चा इस वायरस से संक्रमित नहीं है। चेन्नई में रहने वाली महिला का कहना है कि उसने अस्पताल प्रशासन से कई बार शिकायत की और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सी विजयभास्कर और स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन को पिछले महीने कई याचिकाएं भेजी हैं। वह वायरस की चपेट में आने को लेकर न्याय चाहती है।
महिला ने कहा, 'मुझे उनसे कोई जवाब नहीं मिला है। केएमसी के प्रधानाध्यापक से मिलने की मेरी सारी कोशिशें असफल रही हैं क्योंकि जब भी मैं मिलने का समय लेने के लिए जाती हूं मुझे रोक दिया जाता है। मार्च 2018 में जब मैंने ब्लड टेस्ट करवाया था तब मैं एचआईवी नेगेटिव थी। मेरे पास सरकार के खिलाफ केस करने के लिए न तो पैसा और न ही हिम्मत है। मैं पूरी तरह से टूट चुकी हूं क्योंकि मेरे करीबी रिश्तेदारों और अपनी बहनों में मुझे त्याग दिया है। जैसे ही उन्हें पता चला कि मैं एचआईवी पॉजिटिव हूं उन्होंने मेरे बच्चे को डिलीवरी के बाद छुआ तक नहीं।'
महिला के मेडिकल रिकॉर्ड्स के अनुसार उसने फरवरी में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र जाकर मासिक धर्म अनिययमिता की शिकायत को लेकर सलाह ली थी। मार्च में वह फिर स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य समस्या को लेकर पहुंची। एक निजी लैब में उसका ब्लड टेस्ट हुआ। जहां पता चला कि वह खून की कमी से पीड़ित है और उसके ह्यूमोग्लोबिन का स्तर मानक से नीचे है। उसे ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए केएमसी रेफर किया गया।
महिला ने बताया कि उसने 14 दिन केएमसी अस्पताल में बिताए जहां उसका दो यूनिट ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ। उसे खून की कमी के लिए 10 इंजेक्शन लगे। उस समय वह पांच महीने की गर्भवती थी। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद महिला का ह्यूमोग्लोबिन स्तर बेहतर हो गया और उसे छुट्टी दे दी गई। स्वास्थ्य केंद्र के निर्देश पर महिला का मेडिकल स्कैन हुआ जहां पता चला कि भ्रूण को कुछ समस्या है।
महिला को फिर दोबारा 18 अगस्त को केएमसी भेजा गया। आउट पेशेंट होने की वजह से उसे ब्लड टेस्ट करवाने को कहा गया जहां पता चला कि वह एचआईवी पॉजिटिव है। इसके बाद उसके पति को बुलाकर ब्लड टेस्ट करवाया गया। महिला के पति का परिणाम एचआईवी नेगेटिव आया।