विशेषज्ञों का कहना है कि दरअसल अमेरिका अफगानिस्तान को भौगोलिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण मानता है। साउथ एशिया मामलों के जानकार डॉक्टर अनुज भट्ट बताते हैं कि अफगानिस्तान में रहकर अमेरिका, चीन, रूस, पाकिस्तान और भारत को बहुत बारीकी से नजर रखेगा। क्योंकि अब यहां पर अमेरिकी फौजी और अमेरिका के सीक्रेट एजेंट खुले तौर पर मौजूद नहीं रहेंगे। ऐसे में अमेरिका को डर है कि कहीं चीन रूस और भारत मिलकर उसके सारे खेल को ना बिगाड़ दें। डॉक्टर भट्ट का कहना है कि अमेरिका इस बात से भी डरा हुआ है कि उसकी अनुपस्थिति में अगर चीन, अफगानिस्तान समेत आसपास के मुल्कों पर हावी हो गया तो भी उसका नुकसान होगा और अगर रूस भारी पड़ा तो भी उसका नुकसान होगा। विशेषज्ञों का कहना है क्योंकि भारत की 'वेट एंड वॉच' रणनीति से अमेरिका अभी भी घबराया हुआ है। अमेरिका चाहता है कि भारत अफगानिस्तान को लेकर अपनी कूटनीतिक रणनीति को सामने लाएं ताकि भारत का अफगानिस्तान के लिए रुख स्पष्ट समझा जा सके।
कहने को तो अमेरिका अफगानिस्तान में तालिबानियों की सत्ता बना कर पूरे तरीके से गुणाभाग करने में जुड़ा हुआ है, लेकिन पाकिस्तान का रोल खुलकर सामने आने लगा है। अफगानिस्तान में सरकार गठन से पहले शनिवार को आईएसआई प्रमुख फैज हमीद काबुल पहुंच गए। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि फैज हमीद अफगानिस्तान में सरकार गठन से लेकर होने वाले मंत्रियों के चयन से लेकर अन्य लोगों को दी जाने वाली जिम्मेदारियों की पूरी फेहरिस्त लेकर पहुंचे हुए हैं। यह लिस्ट पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान को मुहैया कराई जा रही है, ताकि उसके कहने पर ही वहां पर तालिबान के आतंकियों को कैबिनेट में शामिल किया जा सके। विदेशी मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है इनमें कई ऐसे लोगों के नाम भी हैं जो पाकिस्तान से लेकर अफगानिस्तान की जेलों में लंबे समय तक बंद रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा मुहैया कराई गई लिस्ट में जिन आतंकियों के नाम हैं वह आईएसआई से लेकर सीआईए की खुफिया एजेंसी से जुड़े हुए लोग हैं।