24 जनवरी को ही इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। इसलिए इस दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज के दिन इंदिरा गांधी को नारी शक्ति के रूप में याद किया जाता है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लिया गया है। आज बेटियां जीवन की हर चुनौतियों से पार पाते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, चाहे पढ़ाई हो, खेल हो, राजनीति हो, बिजनेस हो, प्रोफेशन हो, घर हो या उद्योग।
बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है लेकिन आज भी वह कुरीतियों का शिकार हैं। जागरूक समाज भी इस समस्या से अछूता नहीं है। हज़ारों लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है या जन्म लेते ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। आज भी समाज में कई घर ऐसे हैं, जहां बेटियों को बेटों की तरह अच्छा खाना और अच्छी शिक्षा नहीं दी जा रही है।
एक सरकारी सर्वेक्षण में 42 प्रतिशत लड़कियों ने यह बताया कि वे स्कूल इसलिए छोड़ देती हैं, क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें घर संभालने और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करने को कहते हैं। लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति आगाह करने और लड़कियों को बचाने के लिए 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।