केंद्रीय सूचना आयोग ने केंद्र सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि ताजमहल शाहजहां द्वारा बनवाया गया मकबरा है या शिव मंदिर, जिसे एक राजपूत राजा ने मुगल शासक को उपहार में दिया था। इतिहास के इस दूसरे पहलू वाला प्रश्न कुछ लोगों ने आरटीआई के माध्यम से पूछा है। इतिहासकार होने का दावा करने वाले इन लोगों ने कई अदालती मामलों का हवाला देते हुए यह प्रश्न पूछा है। यह मामला अब संस्कृति मंत्रालय के पास है।
यूपी के डिप्टी सीएम बोले, ताजमहल हमारी संस्कृति का प्रतीक नहीं
सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने मंत्रालय को इस विवाद को समाप्त करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने दुनिया के अजूबे में शुमार सफेद संगमरमर के इस मजार के इतिहास के संदेह को दूर करने को कहा। दरअसल ताजमहल की वास्तविकता पर बार-बार सवाल उठाए जा रहे हैं। इतिहासकार पी एन ओक और वकील योगेश सक्सेना ने इसकी जानकारी मांगी उसके बाद आचार्युलु ने सरकार को इस पर अपना रुख साफ करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सहित कुछ कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया, जबकि कुछ अदालतों में यह मामला अभी लंबित है। आचार्युलु ने कहा कि कुछ मामलों में भारतीय पुरातत्व विभाग भी पार्टी है, उन्होंने जवाबी हलफनामा दायर किया है। आयोग ने पुरातत्व विभाग को निर्देश दिया है कि वह उन कॉपी को अतिरिक्त फीस लेकर 30 अगस्त से पहले अपीलकर्ताओं से साझा करे। एक याची बीकेएसआर अय्यंगर ने एएसआई से आरटीआई के जरिये पूछा है कि वह बताए कि आगरा का स्मारक ताजमहल है या ‘तेजो महालया।’ उन्होंने कहा कि कई लोग कहते हैं कि ताजमहल दरअसल शाहजहां का बनाया मकबरा नहीं बल्कि राजा मानसिंह द्वारा उपहार में दिया गया मंदिर है।