पांच राज्यों में विधानसभा का चुनावी बिगुल बज चुका है। इस बार देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी सुधार की बातें करने वाली पार्टियां कितने दागियों को टिकट देने से कतराती हैं। क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में सभी बड़ी पार्टियों ने जमकर दागियों और रसूखदारों को टिकट दिए थे। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2007 की अपेक्षा वर्ष 2012 में दागी उम्मीदवारों की संख्या दोगुनी हो गई थी। वर्ष 2007 में 777 और वर्ष 2012 में 1557 दागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) चुनावी सुधार पर काम करने वाली एक गैर सरकारी संस्था है। इसने वर्ष 2007 और 2012 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव में खड़े हुए उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया था। इस हलफनामे में चुनाव में खड़े उम्मीदवार को जरूरी जानकारी दर्ज करा कर चुनाव आयोग को सौंपना होता है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में 4433 और वर्ष 2012 में 8978 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया।
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 में कुल 6661 उम्मीदवार खड़े थे। इसमें से 1299 दागी उम्मीदवार थे, जबकि 567 उम्मीदवारों पर बेहद संगीन मामले दर्ज थे। उधर, 2007 के चुनाव में 3189 उम्मीदवारों में से 629 दागी थे और 316 उम्मीदवारों पर गंभीर मामले दर्ज थे। वहीं उत्तराखंड में 777 उम्मीदवारों ने वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। इनमें से 106 उम्मीदवारों पर क्रिमिनल और 28 उम्मीदवारों पर गंभीर मामले दर्ज थे। वहीं 2007 में कुल 260 उम्मीदवारों में से 46 पर क्रिमिनल केस दर्ज थे और सिर्फ 15 उम्मीदवारों पर संगीन मामले दर्ज थे।