2008 के मुंबई हमलों में तहव्वुर राणा का सबसे पहले नाम उसके दोस्त डेविड कोलमैन हेडली की गवाही के बाद आया था। 17 साल के इंतजार के बाद तहव्वुर राणा भारत में कानूनी कार्रवाई का सामना करेगा। आइए जानते हैं कि हेडली की किस गवाही के आधार पर तहव्वुर राणा को दोषी माना गया और अब वह कहां है?
भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर 2008 में हुए आतंकी हमलों की साजिश का खुलासा तहव्वुर राणा के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली ने ही किया था। हेडली की गवाही के बाद ही राणा को हमले की साजिश रचने का दोषी माना गया। 17 साल के इंतजार के बाद तहव्वुर राणा को भारत में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या साजिश की पूरी कहानी बताने वाला राणा को दोस्त हेडली भी भारत आएगा? आइए जानते हैं कि हेडली की किस गवाही के आधार पर तहव्वुर राणा को दोषी माना गया और अब हेडली कहां है?
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मुंबई की विशेष अदालत को दी थी गवाही
2008 के मुंबई हमलों में तहव्वुर राणा का सबसे पहले नाम उसके दोस्त डेविड कोलमैन हेडली की गवाही के बाद आया था। हमलों के मुख्य आरोपी हेडली ने 2016 में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुंबई की एक विशेष अदालत के समक्ष ने कहा था कि तहव्वुर राणा ने अपनी कंसल्टेंसी फर्म्स में उसे नौकरी दी। इसी फर्म की मुंबई शाखा के काम के लिए डेविड हेडली मुंबई आया था और यहां लश्कर-ए-तयैबा के आतंकी हमलों की तैयारी के लिए मुंबई में ताज महल होटल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसी प्रमुख जगहों की रेकी की। राणा ने कंसल्टेंसी फर्म की आड़ में ही डेविड हेडली से रेकी का पूरा काम कराया था। हेडली ने खुलासा किया था कि राणा ने उसे और आतंकी हमलों की साजिश रचने में शामिल अन्य लोगों को रसद, वित्तीय और अन्य सहायता प्रदान की थी।
डेनिश अखबार पर हमले की रची थी साजिश
डेविड हेडली ने अभियोजकों को खुलकर तहव्वुर राणा के खिलाफ सबूत दिए थे। हेडली ने बताया था कि डेनमार्क में डेनिश अखबार पर हमले के लिए तहव्वुर राणा ने ही उसके दौरे को मंजूरी दी थी। वह डेनमार्क में राणा की फर्म से ही आव्रजन कानून केंद्र का प्रतिनिधि बन कर गया था। इसके लिए राणा ने हेडली के बिजनेस कार्ड छपवाए थे। हालांकि, अल-कायदा की तरफ से 'मिक्की माउस प्रोजेक्ट' कोडनेम वाले जिलेंड्स-पोस्टेन अखबार पर हमले को अंजाम नहीं दिया जा सका। हेडली-राणा पर अखबार के कर्मचारियों पर हमले और पास ही एक यहूदी पूजास्थल को निशाना बनाने के लिए साजिश रचने के आरोप लगे थे।
हेडली ने कोर्ट को बताया था कि उसने पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा के प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया था। 2002 से 2005 के बीच पांच अलग-अलग मौकों पर प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया था। 2005 के अंत में हेडली को लश्कर के सदस्यों से भारत में निगरानी करने के लिए यात्रा करने के निर्देश मिले, जो उसने पांच बार किया। डेविड हेडली ने कहा कि वह हमलों से पहले आठ बार और उसके बाद एक बार भारत आया था। उसने दो साल तक साइटों पर शोध किया। शहर के बंदरगाह के चारों ओर नाव से सैर की और बॉलीवुड सितारों से दोस्ती की।
बन गया सरकारी गवाह, नहीं आएगा भारत
अमेरिका में राणा के खिलाफ बयान देकर हेडली सरकारी गवाह बन गया। डेविड हेडली मुंबई हमलों में अपनी भूमिका के लिए 35 साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद अमेरिकी जेल में है। भारत कई बार उसके भी प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है। सहायक अमेरिकी अटॉर्नी जॉन जे लुलेजियन ने लॉस एंजिलिस में एक संघीय अदालत को बताया कि मुंबई हमले में हेडली ने तुरंत जिम्मेदारी स्वीकार कर ली थी और सभी आरोपों में दोषी होने की दलील दी थी। हेडली ने आवश्यक शर्तें पूरी की थीं, इसलिए याचिका समझौते के मुताबिक उसे हेडली को भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा। जबकि राणा ने न तो दोषी होने की दलील दी और न ही अमेरिका के साथ सहयोग किया।