आदर्शनगर के तीस वर्षीय हरिओम साहू एक स्विमिंग ट्रेनर हैं और दिल्ली के कई फाइव स्टार होटलों में लोगों को स्विमिंग की ट्रेनिंग देते हैं। लेकिन उनकी एक और पहचान है जो उन्हें बाकी लोगों से अलग खड़ा करती है। वे हर उस पाकिस्तानी हिंदू की मदद के लिए खड़े रहते हैं, जो पाकिस्तान में किसी तरह प्रताड़ित है। इसके लिए आर्थिक मदद देने से लेकर उन्हें पाकिस्तान से हिंदुस्तान आने तक में वे उनकी हर संभव मदद करते हैं। वे अब तक 434 से अधिक पाकिस्तानी हिंदुओं को भारत आने में मदद कर चुके हैं। वही इन हिंदुओं के भारत में गारंटर हैं।
हरिओम साहू ने बताया कि 2012-13 में उन्हें इस बात की सूचना मिली थी कि आदर्शनगर कैंप के पास 20 पाकिस्तानी हिंदू परिवार आए हुए हैं। जब उन्होंने जाकर देखा तो उनकी स्थिति देखकर द्रवित हो गए। उन्होंने न सिर्फ उनके रहने-खाने की व्यवस्था की, बल्कि उसके बाद उन्होंने बाकी हिंदुओं की मदद करने की भी ठान ली। पुलिस पाकिस्तानी हिंदुओं को वहां बसने देने की अनुमति नहीं दे रही थी। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाकात की और उनकी पहल पर पाकिस्तानी हिंदुओं को वहां पर रहने की अनुमति मिल गई। हालांकि, पाकिस्तानी हिंदुओं को यह लिखकर देना पड़ा कि वे यहां स्थाई रुप से नहीं बसेंगे और जब भी सरकार उन्हें वह जमीन खाली करने का आदेश देगी, वे उसे खाली कर देंगे।
भारत में पाकिस्तान से हिंदुओं का आना लगातार जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी हिंदू धार्मिक पर्यटन वीजा पर भारत में आते हैं और उसके बाद वापस जाने के लिए तैयार नहीं होते। वे पाकिस्तान में अपने धार्मिक उत्पीड़न और बदहाल जिंदगी का हवाला देते हैं और वापसी से इनकार करते हैं।
आदर्शनगर कैंप में बसे पाकिस्तानी हिंदुओं के कैंप तक बिजली-पानी की सप्लाई नहीं है। वे यहां बाजार से खरीदकर लगाए गए सोलर बिजली की रोशनी में रहते हैं। पीने के लिए आसपास से पानी लाते हैं। कभी-कभी दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर आता है, लेकिन अब इनकी आबादी तकरीबन 780 हो चुकी है, जिसके लिए एक टैंकर कम पड़ता है। उन्हें सीधे बोरिंग का पानी इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे बीमारी होने की हमेशा संभावना बनी रहती है।
इस कैंप में अब लगभग 127 बच्चे हैं। कागजात की कमी के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। पाकिस्तान से ही स्नातक तक पढ़े विक्रम इन बच्चों को प्राथमिक स्तर की शिक्षा दे रहे हैं। वे बच्चों को हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी की प्राथमिक स्तर की जानकारी दे रहे हैं। इससे बच्चे शुरुआती स्तर की किताबें पढ़ना और थोड़ा-बहुत हिसाब करना सीख गए हैं।
एक पाकिस्तानी हिंदू ने बताया कि उनके पास पहचान पत्र न होने के कारण कोई उन्हें नौकर रखने को भी तैयार नहीं होता। इस कारण वे दैनिक मजदूर की तरह काम कर रहे हैं। जहां भी मौका मिल जाता है, एक-दो दिन की मजदूरी कर परिवार के लिए राशन खरीद लेते हैं और इसी प्रकार से परिवार का गुजारा हो रहा है। महिलाएं आस-पास कुछ सामान बेचकर परिवार के लिए अतिरिक्त आय पाने की कोशिश करती हैं। इन हिंदुओं में क्षत्रिय परिवारों से लेकर दलित समाज के परिवार तक शामिल हैं। पाकिस्तान में हो रहे धार्मिक उत्पीड़न ने इन्हें मजदूर बना दिया है।