स्वराज इंडिया पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज तक नेता किसानों को नचाते आए थे, लेकिन इस बार किसानों ने नेताओं को अपनी धुन पर नाचने को मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर किसान अपनी एकता को समझें और चुनाव में जाति-धर्म की बजाय किसानी के मुद्दे पर वोट दें तो कोई भी सरकार कभी भी उनकी जरुरतों की अनदेखी नहीं कर सकती।
यादव ने कहा कि आज देश के किसान और युवा अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसान को उचित फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। किसानों की भलाई के नाम पर कई योजनाएं लाई जाती हैं, लेकिन असलियत में उनके माध्यम से उद्योगपतियों का घर भरा जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकारें जो भी योजनाएं किसानों के लिए लाने का दावा कर रही हैं, वे बेसिर पैर हैं और उनसे किसानों का हित नहीं सधने वाला है। अगर वे किसानों का हित साधना चाहती हैं तो उन्हें उन्हीं बिलों को पास करना पड़ेगा जिसे किसानों ने जंतर-मंतर पर तैयार किया था और एक किसान नेता के द्वारा संसद के संज्ञान में लाया गया था। वे बुलंदशहर में आयोजित किसान-युवा संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसानों के बाद सबसे ज्यादा युवाओं की समस्या भयावह है। उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है और ऐसे में उन्हें बेरोजगार भटकना पड़ रहा है। अगर सरकार इस परेशानी का हल निकालना चाहती है तो उसे किसानी को लाभकारी सौदे में तब्दील करना पड़ेगा।
कृषि क्षेत्र ही ऐसा है जो सबसे ज्यादा युवाओं को नौकरी देने की क्षमता रखता है। ऐसे में सरकार चाहे तो किसानों के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं की समस्या एक साथ हल कर सकती है।
उन्होंने किसानों से कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों की तरह अपनी एकता बनाए रखें और आने वाले चुनाव में उसी दल को वोट दें जो उनकी मांगों को गंभीरता से पूरा करता हुआ दिखाई पड़े। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए और खेती को बचाने के लिए यह कदम उठाना बेहद आवश्यक है।