मामले में पलटवार करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी भाजपा में शामिल होने से पहले ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में मंत्री थे। उनका नाम खुद शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन ने घोटाले के मुख्य लाभार्थियों में से एक के रूप में लिया था।
सुवेंदु अधिकारी ने पत्र में आरोप लगाया कि सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, क्योंकि यह एक बड़ा घोटाला था। इसमें सत्ता में उच्च पदों पर बैठे लोगों के संरक्षण के कारण कथित रूप से जनता को हजारों करोड़ रुपये की चपत लगाई गई थी। ऐसे में सीबीआई से उच्च पद पर बैठे व्यक्ति पर शिकंजा कसने की उम्मीद थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि शारदा के साथ ममता बनर्जी का संबंध उस समय से है, जब वह यूपीए-2 सरकार में रेल मंत्री थीं। क्या इसीलिए सीबीआई हिचकिचा रही है? या उनकी कुर्सी की ऊंचाई ने उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ बना दिया है? क्या यह सीबीआई को जांच सौंपने का प्राथमिक कारण नहीं था?
मामले में टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी अपने भ्रष्टाचार के दाग धोने के लिए भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि सुवेंदु को कांच के घर में रहते हुए पत्थर नहीं फेंकना चाहिए। शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन ने उन्हें मुख्य लाभार्थियों में से एक के रूप में नामित किया था। वे अपने भ्रष्टाचार के दाग धोने के लिए भाजपा की वाशिंग मशीन में घुस गए।