भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वह भड़काऊ टिप्पणी मामले में शीर्ष अदालत में पहुंचे हैं। बंगाल के हाल के पंचायत चुनाव के दौरान कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
इस दिन होगी याचिका सूचीबद्ध
हाईकोर्ट ने 20 जुलाई को भाजपा नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने का आदेश दिया था। मामला पंचायत चुनाव के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है। शीर्ष कोर्ट में अधिकारी की ओर से पेश वकील बांसुरी स्वराज ने जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया, जिन्होंने कहा कि मामले पर पूर्वनिर्धारित तिथि 4 अगस्त को ही सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता की तरफ से 31 जुलाई को सुनवाई की अपील कोर्ट ने ठुकरा दी।
स्वराज ने कहा कि हाईकोर्ट का 20 जुलाई का आदेश सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश और हाईकोर्ट की समन्वय पीठ की तरफ से याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी पर रोक लगाने संबंधी आदेश के खिलाफ है। उन्होंने कहा, हाईकोर्ट के आदेश से अधिकारी के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हो सकती हैं। 24 जुलाई को विशेष अनुमति याचिका दायर करने के बाद भी उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। वकील ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट का आदेश याचिकाकर्ता को सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना एक जनहित याचिका के आधार पर पारित किया गया है।
यह है मामला
गौरतलब है, पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में तगड़ा झटका दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि कलकत्ता पुलिस अब से किसी भी वैध मामले में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकती है। कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस के पास सही जानकारी है तो मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती है। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा के पहले के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सुवेंदु अधिकारी को पिछले दिसंबर से पश्चिम बंगाल में पुलिस द्वारा एफआईआर से संरक्षण दी गई थी।