देश में मंकीपॉक्स का पहला मामला मिलने की पुष्टि हो गई है। संक्रमित शख्स केरल का रहने वाला है और कुछ दिन पहले ही यूएई से लौटा था। तीन दिन पहले जांच के दौरान वह पॉजिटिव मिला था, जिसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मामले की पुष्टि की। बता दें कि मामले की जानकारी मिलते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आनन-फानन में उच्चस्तरीय मेडिकल टीम को जांच के लिए केरल के कोल्लम भेज दिया है।
अधिकारियों ने दी यह जानकारी
इस मामले में अधिकारियों ने बताया कि किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। मंकीपॉक्स को लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी घाव, शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ, रेस्पिरेट्री ड्रॉपलेट्स और दूषित चीजों के संपर्क में आने से फैलती है।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने कही यह बात
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि मंकीपॉक्स के मामले की पुष्टि हुई है। पीड़ित शख्स यूएई से लौटा था। वह 12 जुलाई को केरल आया था। त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट पहुंचने के बाद जांच के दौरान वह संक्रमित मिला, जिसके बाद डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।
पशुओं से इंसानों में फैलता है वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोसिस (पशुओं से इंसान में फैलने वाला वायरस) है। इसमें पूर्व में चेचक के रोगियों में देखे गए लक्षणों के समान लक्षण होते हैं।हालांकि, इलाज की दृष्टि से यह कम गंभीर है। 1980 में चेचक के खात्मे और उन्मूलन और उसके बाद इसके टीकाकरण की समाप्ति के बाद मंकीपॉक्स बड़ा ऑर्थोपॉक्सवायरस के रूप में उभरा है।