सातवें हार्ट ऑफ एशिया की अजरबैजान के बाकू में तैयारियां चल रही हैं। 30 नवंबर और पहली दिसंबर को यह सम्मेलन वहां होना है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का अजरबैजान का दौरा प्रस्तावित है। उनके साथ विदेश सचिव एस जयशंकर भी जाएंगे।
सूत्र बताते हैं कि अजरबैजान में विदेश मंत्री आतंकवाद पर पाकिस्तान को न केवल आईना दिखाएंगी, बल्कि सबकुछ ठीक रहा तो दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्ते की पटकथा भी तैयार होगी।
अफगानिस्तान के आसपास के सदस्य देशों की इस बैठक की थीम सेक्योरिटी एंड इकोनॉमिक कनेक्टिविटी टुआर्ड्स स्ट्रेंथेंड एशिया रीजन रखी गई है।
हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हार्ट ऑफ एशिया क्षेत्र में राजनीतिक संवाद में तेजी लाना, शांति, स्थायित्व, समृद्धि के लिए घनिष्ठ सहयोग तथा संपर्क स्थापित करना तथा अफगानिस्तान से इसके पड़ोसी देशों को जोड़ना है।
अफगानिस्तान इसके केन्द्र में है और आतंकी हमलों की संभावना ने वहां लगातार अस्थिरता का माहौल बनाए रखा है। पिछले साल इस सम्मेलन का आयोजन चार दिसंबर को भारत में हुआ था। इससे पहले 2015 में पाकिस्तान इसका आयोजक था।
हार्ट ऑफ एशिया
हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रॉसेस की शुरूआत नवंबर 2011 में हुई थी। इसका उद्देश्य अफगानिस्तान को ध्यान में रखकर वहां स्थिरता, पड़ोसी देशों से संपर्क, सुरक्षा आदि को सुनिश्चित करना है।
इसके आलोक में पड़ोसी देशों के बीच सहयोग, संबंध बढ़ाना भी है। इसके सदस्य देशों में अफगानिस्तान, भारत, पाकिस्तान, चीन, अजरबैजान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, रूस सऊदीअरब, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, यूएई समेत अन्य देश हैं।
अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों, वहां शांति, सरक्षा तथा पुननिर्माण को ध्यान में रखकर भारत भी इसे काफी अहमयित देता है।