सऊदी अरब में फंसे 10000 भारतीय कामगारों को न सिर्फ जल्द स्वदेश लाया जाएगा, बल्कि इनके संबंधित कंपनी के पास बकाए की भी वसूली होगी। यह आश्वासन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के दोनों सदनों में दिया।
उन्होंने दोनों सदनों में कामगारों के संकट की जानकारी देते हुए बताया कि इनकी सुरक्षित वतन वापसी की व्यवस्था के लिए मंगलवार को विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह को सऊदी अरब रवाना किया जा रहा है।
इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मिलने के बाद दोनों सदनों के कई सांसदों ने विदेश मंत्री की पार्टी लाइन से ऊपर उठ कर तारीफ की। लोकसभा स्पीकर ने तो यहां तक कहा कि विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को राहत देने के मामले में ऐसा काम पहले किसी ने नहीं किया था।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद केवी थॉमस द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में सुषमा ने कहा कि वह हर घंटे इस अभियान की निगरानी कर रही हैं। यहां तक कि रविवार रात तड़के तीन बजे उन्हें कैंपों में रह रहे सभी कामगारों को एक हफ्ते का राशन उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।
विदेश मंत्री ने कहा कि अब सवाल इनकी वतन वापसी और बकाए के भुगतान की है। वहां के कानून के मुताबिक संबंधित कंपनी के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना कामगार वापस नहीं लौट सकते। इस संबंध में उन्होंने अपने सऊदी के समकक्ष से बात की है और कहा है कि ऐसा प्रमाण पत्र भारत सरकार की ओर से दिया जाएगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि समस्या यह भी है कि कामगार जिन कंपनियों में काम करते थे, उन्होंने कंपनी बंद कर देश छोड़ दिया है। ऐसे में उन्होंने इस मामले में कंपनियों की संपत्तियों का हिसाब करते समय सबसे पहले कामगारों के बकाए वेतन की भुगतान की मांग की है।
विदेश मंत्री ने बताया कि अब भावी कार्रवाई के लिए खुद विदेश राज्य मंत्री सिंह मंगलवार को सऊदी अरब के लिए रवाना होंगे। गौरतलब कि भारत के विभिन्न राज्यों के करीब 10000 कामगार सऊदी अरब में फंसे हुए हैं।
इनके सामने भुखमरी का संकट होने की खबर के बाद खुद विदेश मंत्री ने मदद की पहल की। सबसे पहले उन्होंने यहां के दूतावास को कामगारों की मदद के निर्देश दिए। इसके बाद वहां रह रहे भारतवंशियों से भी मदद की अपील की।