बाॅम्बे हाईकोर्ट ने ‘एम एस धोनी, द अनटोल्ड स्टोरी‘ में दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के काम की बृहस्पतिवार को तारीफ की और कहा कि कोई भी व्यक्ति अभिनेता का चेहरा देखकर बता सकता था कि वह अच्छे मनुष्य थे।
#SushantSinghRajput death case: Bombay High Court reserve the order on an application filed by his sisters seeking quashing of FIR filed by Rhea Chakraborty, alleging their involvement in his death. Court also asked all the parties to file their written submissions within a week. pic.twitter.com/bCTdhaenS5
— ANI (@ANI) January 7, 2021
उल्लेखनीय है कि सुशांत 14 जून, 2020 को मुंबई के उपनगर बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में मृत मिले थे। सीबीआई मामले की जांच कर है। उल्लेखनीय है कि राजपूत की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच से नाराज उनके पिता केके सिंह ने बिहार पुलिस के समक्ष रिया चक्रवर्ती, उसके परिवार के सदस्यों और अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज कराया था। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया।
सुशांत की बहनों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बृहस्पतिवार को तर्क दिया कि ‘टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस’ संबंधी दिशा-निर्देश ऑनलाइन सलाह लेने के बाद चिकित्सक को दवा सबंधी परामर्श देने की अनुमति देते हैं। कोविड-19 के कारण राजपूत चिकित्सक के मिलने के लिए व्यक्तिगत रूप से उनके पास नहीं जा सके थे। यदि यह मान भी लिया जाए कि चिकित्सकीय पर्चा खरीदा गया था, तो भी इस बात का कोई सबूत नहीं है कि राजपूत ने कोई दवा खाई थी।
मुंबई पुलिस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने दावा किया कि इस मामले में ऑनलाइन कोई सलाह नहीं ली गई थी। कामत ने कहा कि राजपूत और उनकी बहनों के बीच आठ जून, 2020 को वाट्सएप पर हुई बातचीत स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि प्रियंका ने मरीज द्वारा चिकित्सक से सलाह लिए बिना ही पर्चा हासिल किया। कामत ने कहा, ‘‘पुलिस के पास इस बात का सबूत है कि एक अज्ञात व्यक्ति आठ जून, 2020 को राम मनोहर लोहिया अस्पताल की ओपीडी में गया था। उसने टोकन लिया और बाद में आरोपी चिकित्सक तरुण कुमार से पर्चा लिया।’’
इस बीच, रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने याचिका खारिज किए जाने का अनुरोध किया और कहा कि राजपूत की मौत का एक कारण ‘‘नशीले पदार्थों और दवाइयों का खतरनाक मिश्रण’’ हो सकता है। पीठ ने वकीलों को लिखित में अभ्यावेदन देने का आदेश दिया और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।