बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 2 माह बीत जाने के बाद भी मुंबई पुलिस अभी तक अंधेरे में तीर मार रही है। सुशांत की आत्महत्या को लेकर व्यक्त किए जा रहे संदेह के बावजूद पुलिस ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। केवल एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) के तहत मामले की जांच हो रही है।
मुंबई पुलिस पर सुशांत सिंह आत्महत्या मामले में लगातार ढिलाई बरतने के आरोप लग रहे हैं। मुंबई पुलिस ने सुशांत सिंह से संबंधित और बॉलीवुड के लोगों से पूछताछ की। लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस मामले की जांच में बिहार पुलिस का भी सहयोग नहीं किया।
मुंबई पुलिस के असहयोग के बाद बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। वहीं, पुलिस पर राजनीतिक दबाव का भी आरोप लगा। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में भी मुंबई पुलिस सहयोग नहीं कर रही है। कहा जा रहा है कि ईडी को मुंबई पुलिस से जो सबूत या दस्तावेज चाहिए, वह उपलब्ध नहीं करा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईडी ने चार बार सुशांत के मोबाइल फोन की मांग की, लेकिन मुंबई पुलिस ने सुशांत का फोन ईडी को नहीं सौंपा। ईडी ने 14 दिन पहले बीते 31 जुलाई को सुशांत के बैंक खातों से रकम की हेराफेरी और मनीलॉन्ड्रिंग के मामले में एफआईआर दर्ज की थी।
हालांकि ईडी के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा सके हैं कि सुशांत के खाते से निकले 15 करोड़ रुपये कहां गए, जैसा कि अभिनेता के पिता केके सिंह ने आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार ईडी की जांच में अभी तक यह सामने नहीं आ पाया है कि कितने रुपये सीधे सुशांत के खाते से उनकी मंगेतर रिया चक्रवर्ती के खाते में गए।
क्योंकि ईडी को सुशांत के खाते से रिया के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि सुशांत के कई खातों से नेट बैंकिंग और डेबिट कार्ड से हुए ट्रांजेक्शन की जांच जारी है। ईडी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इस निकासी की मैपिंग कर यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पैसा कहां गया और इसके पीछे क्या मकसद था।
24 दिनों तक अपने पास क्यों रखा सुशांत का मोबाईल फोन: भाजपा प्रवक्ता
इस बीच शुक्रवार को प्रदेश भाजपा प्रवक्ता व विधायक राम कदम ने कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह मामले में महाराष्ट्र सरकार सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रही है। कदम ने कहा कि आखिर सुशांत का मोबाइल फोन फॉरेंसिक विभाग के पास भेजने के बजाय पुलिस अपने पास 24 दिनों तक क्यों रखे रही।
भाजपा विधायक ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के इसी रवैए के चलते सुशांत के परिवार सहित पूरा देश विश्वास नहीं कर पा रहा है। राम कदम ने कहा कि अब महाराष्ट्र सरकार को हठ छोड़कर मामले की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए।