शिंदे ने बताया, 'कांग्रेस विधायक रामप्रसाद बोर्डिकर (तत्कालीन) और मैं एक कार्यक्रम के लिए मुंबई जा रहे थे। हमने आखिरी समय में टिकट लिया और कॉकपिट के बगल वाली सीट पर बैठ गए।' विमान ने उड़ान भरने के लिए आवश्यक गति नहीं पकड़ी और इस वजह से विमान के पीछे का लैंडिंग गियर हवाई अड्डे के बाहर एक ट्रक से टकरा गया।'
अहमदाबाद में हुए विमान हादसे से पूरे देश में दुख का माहौल है। इस हादसे ने पिछले कई विमान हादसों की दुखदायी स्मृतियों को फिर से याद दिला दिया है। साल 1993 में भी एयर इंडिया का एक विमान हादसे का शिकार हुआ था। उस हादसे में जिंदा बचे महाराष्ट्र के परभणी जिले के रहने वाले वसंत शिंदे ने उस हादसे को याद किया और बताया कि किस तरह से वे मौत को चकमा देने में सफल रहे थे।
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औरंगाबाद से मुंबई की फ्लाइट हुए थी हादसे की शिकार
परभणी जिले के जिंतूर के पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष वसंत शिंदे ने बताया कि वह 1993 की त्रासदी में बच गए थे, जिसमें 55 लोगों की जान चली गई थी। उनका विमान 11 केवी बिजली लाइन से टकरा गया था। हालांकि सौभाग्य से लाइन में बिजली नहीं थी, वरना हादसा और भयावह हो सकता था। 26 अप्रैल, 1993 को एयर इंडिया के उस विमान ने औरंगाबाद जिले (अब छत्रपति संभाजीनगर) के चिकलथाना हवाई अड्डे से मुंबई के लिए उड़ान भरी थी। एयर इंडिया की फ्लाइट 491 का लैंडिंग गियर रनवे से टेकऑफ करते समय सड़क पर एक ट्रक से टकरा गया। इससे अनियंत्रित होकर विमान हाई-टेंशन बिजली की लाइन से टकरा गया। गनीमत रही कि उस वक्त लाइन में बिजली नहीं थी। इसके बाद विमान एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जमीन पर गिरते ही विमान तीन टुकड़ों में बंट गया और फिर उसमें आग लग गई। विमान में सवार 112 यात्रियों में से 55 की मौत हो गई।
ट्रक से टकराए लैंडिंग गियर
शिंदे ने बताया, 'कांग्रेस विधायक रामप्रसाद बोर्डिकर (तत्कालीन) और मैं एक कार्यक्रम के लिए मुंबई जा रहे थे। हमने आखिरी समय में टिकट लिया और कॉकपिट के बगल वाली सीट पर बैठ गए।' विमान ने उड़ान भरने के लिए आवश्यक गति नहीं पकड़ी और इस वजह से विमान के पीछे का लैंडिंग गियर हवाई अड्डे के बाहर एक ट्रक से टकरा गया। फिर विमान 11 केवी बिजली की लाइन से जा टकराया, जिसमें सौभाग्य से बिजली नहीं थी।'
उन्होंने कहा,'पायलट विमान को खुले मैदान में ले गया, जहां विमान तीन टुकड़ों में टूट गया।' उन्होंने कहा कि जैसे ही विमान का दरवाजा खुला, तो यह उम्मीद की किरण की तरह था। शिंदे ने याद करते हुए कहा, 'मैंने बिना कुछ सोचे-समझे विमान से छलांग लगा दी। मुझे मामूली चोटें आईं, लेकिन मैं होश में था।' मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिंदे ने बताया, 'बोर्डिकर और मुझे पीछे की सीट की पेशकश की गई थी, लेकिन हमने कॉकपिट के पास बैठना पसंद किया। इस वजह से हम बच गए क्योंकि विमान के पिछले हिस्से में बैठ लोग जलकर मर गए।'