प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' की शुरुआत की हो, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने वाले देशों की सूची में अभी भी भारत बहुत पीछे है। एक सर्वे के मुताबिक, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च करने वाले दुनिया के 195 देशों की सूची में भारत 158वें पायदान पर है। यहां तक कि इस मामले में भारत सूडान, अजरबेजान, चीन और बोस्निया हर्जेगोविना जैसे देशों से भी नीचे है।
सर्वे के मुताबिक, स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर खर्च करने के मामले में फिनलैंड पहले पायदान पर है। सिएटल स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन' द्वारा किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट 'द लंसेट' में प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 1990 में भारत 158वें पायदान पर था, जबकि 2016 में इसमें कुछ सुधार आया है, जिसके बाद इस सूची में भारत 158वें पायदान पर आ गया है।
इससे पहले हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने भी ऐसी ही एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें स्वास्थ्य सूचकांक (हेल्थ इंडेक्स) में 195 देशों की सूची में भारत का स्थान 145वां बताया गया था।
साथ ही इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि भारत में हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च की वजह से पांच करोड़ लोग गरीबी के शिकार हो जाते हैं। दरअसल, भारत में स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का महज 1.25 फीसदी ही खर्च होता है, जिसकी वजह से यहां लोगों पर स्वास्थ्य के खर्चों का भार बढ़ जाता है, जिससे वो धीरे-धीरे कर्ज के बोझ तले दबने लगते हैं।
हालांकि, इस रिपोर्ट में पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश को भारत से बेहतर बताया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण एशियाई देशों में मालदीव स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का 13.7 फीसदी, अफगानिस्तान 8.2 फीसदी और नेपाल 5.8 फीसदी खर्च करते हैं। वहीं, भूटान अपनी जीडीपी का 2.5 फीसदी और श्रीलंका 1.6 फीसदी सेहत पर खर्च करते हैं।