पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (फाइल फोटो)
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दो आंतरिक सर्वेक्षणों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में जनता के बीच भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ रही है और वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का विकल्प बनकर उभर रही है, लेकिन पार्टी को अभी भी कुछ क्षेत्रों में संगठनात्मक मुद्दों का समाधान निकाला बाकी है।
भाजपा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता से हटाने के लिए पुरजोर प्रयासों में लगी हुई है। अपनी और विपक्ष की ताकत और कमजोरी का पता लगाने के लिए भाजपा ने दो अलग-अलग एजेंसियों से प्रदेश के 78,000 बूथों पर लोगों के मिजाज का पता लगाने के लिए सर्वे कराया।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी ऐसा ही एक और सर्वे इस महीने के अंत में कराएगी। पहले के दोनों सर्वे 2019 के अंत और इस साल जुलाई में कराए गए। इन दोनों सर्वे को पार्टी के शीर्ष नेताओं के समक्ष पेश किया गया है। अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव में पार्टी की रणनीति में ये सर्वे अहम भूमिका निभाएंगे।
एक केंद्रीय भाजपा नेता का कहना है कि दूसरे सर्वे में पाया गया कि अम्फान चक्रवात के बाद तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों ने जमीनी परिस्थितियों में बड़ा बदलाव किया और यह परिवर्तन भाजपा के पक्ष में है। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी समर्थन के बावजूद विधानसभा चुनाव अलग माहौल और मुद्दों पर लड़े जाते हैं।
ऐसे में पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। इसलिए जमीनी हालात जानने के लिए सर्वे कराए गए। पार्टी की केंद्रीय यूनिट ने एजेंसियों को नियुक्त किया था और प्रदेश के कुछ ही नेताओं को इस बारे में जानकारी थी। पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले भी ऐसे सर्वेक्षण कराए थे।