असम में कांग्रेस सत्ता का चौका लगाने की तैयारी में थी लेकिन उसे करारी हार मिली। अमूमन हार की वही वजहें बताई गईं जिनमें बीती सरकार की 'कार्यशैली' और 'गवर्नेंस' के मुद्दे शामिल थे। हालांकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि मतदाताओं पर इस चीज का कोई असर नहीं पड़ा होगा। असम में जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी का खुश होना लाजिमी है और उसे उन आधारों पर भी कोई खास आपत्ति नहीं होगी जिन पर उनकी जीत का आकलन किया जा रहा है। लेकिन असम विधानसभा चुनाव के परिणामों का विश्लेषण सिर्फ इन्हीं दो मुद्दों पर नहीं किया जा सकता।
यहां भाजपा को मिली जीत की सबसे बड़ी वजह धर्म है। यह ऐसी वजह साबित हुई जिसके चलते अन्य सभी कारण और कारक इसके नीचे दब कर खत्म से हो गए। यह बात अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के लिए लोकनीति द्वारा किए सर्वे में सामने आई है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि करीब 63 प्रतिशत मतदाता, जिन्होंने खुद की पहचान हिंदू बताई, उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी दलों को वोट दिया। हालांकि धर्म के बारे में मतदाताओं ने तभी बताया जब उनसे पूछा गया।
हालांकि सर्वे के मुताबकि यह कोई नई बात नहीं है बल्कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा हिंदुओं को अपने साथ लाने में सफल हुई थी। भाजपा को उस वक्त भी असम के 58 प्रतिशत हिंदुओं का वोट मिला था। यदि इसी वोट में असम गण परिषद का वोट भी जोड़ देते हैं तो कुल हिंदू मतों का कुल प्रतिशत 65 तक पहुंच जाता है।
हालांकि भाजपा के लिए असम चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती थी कि वो लोकसभा में चुनाव में हासिल हुई सफलता को इस चुनाव में भी जारी रखा जाएगा। भाजपा ऐसा करने में सफल रही। बता दें कि 2011 के असम विधानसभा चुनावों में भाजपा, अगप, बीपीएफ, कांग्रेस और एआईयूडीएफ को क्रमशः 11.5, 16.3, 6.1, 39.4 और 12.6 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं 2014 के लोकसभा के चुनावो में भाजपा ( 36.6 ), अगप ( 3.8 ), बीपीएफ ( 2.2 ), कांग्रेस ( 29.5 )और एआईयूडीएफ ( 14.8 ) प्रतिशत वोट मिले। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को 29.5, अगप 8.1, बीपीएफ 3.9, कांग्रेस 31.0 और एआईयूडीएफ 13.0 प्रतिशत मिले हैं।