उच्चतम न्यायालय ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा पाने वाले दक्षिण भारतीय व्यंजनों की श्रृंखला ‘सर्वना भवन’ के मालिक पी. राजगोपाल को समर्पण के लिए और समय देने से मंगलवार को इनकार कर दिया। राजगोपाल को 7 जुलाई तक समर्पण करना था। न्यायमूर्ति एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजगोपाल की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इस मामले में अपील पर सुनवाई के दौरान उसकी बीमारी का मुद्दा नहीं उठाया गया था।
राजगोपाल को 2004 में एक कर्मचारी की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई है। राजगोपाल अपने एक कर्मचारी की हत्या करके उसकी पत्नी से शादी करना चाहता था। रिपोर्ट बताती है कि वह एक ज्योतिषी की सलाह पर उस महिला को अपनी तीसरी पत्नी बनाना चाहता था।
इससे पहले उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने इसी वर्ष 29 मार्च को राजगोपाल सहित नौ दोषियों की अपील को खारिज करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने 2009 में इस हत्याकांड में राजगोपाल और आठ अन्य की दस-दस साल की कैद की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
1981 में, उन्होंने अपना पहला रेस्तरां ऐसे समय में खोला जब बाहर खाना ज्यादातर भारतीयों के लिए असामान्य था। इस श्रृंखला के रेस्तरां दुनिया भर में न्यूयॉर्क से लंदन तक के मौजूद हैं।