सीमा पार आतंकियों और कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब सरकार ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर रही है। एक जनवरी से 15 जनवरी-2017 तक देश भर में टीबी की पहचान और इलाज के लिए पोलियो की तर्ज पर विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सलाहकार समूह की बैठक में टीबी की दवा, जांच तकनीक और वैक्सीन पर विस्तार से चर्चा हुई।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि एक जनवरी से 15 जनवरी-2017 तक देश में विशेष अभियान चला कर टीबी मरीजों की पहचान और इलाज किया जाएगा। सभी राज्यों में अभियान चलेगा और वैसे इलाकों पर फोकस किया जाएगा जहां टीबी मरीजों के होने की संभावना ज्यादा है। स्लम और दूसरे इलाकों पर भी फोकस किया जाएगा। करीब 11 लाख टीबी मरीजों का कोई पता-ठिकाना नहीं है लिहाजा उन्हें इस अभियान के माध्यम से जोड़ा जाएगा। अभियान का मूल्यांकन किया जाएगा और फिर छह माह बाद दुबारा अभियान चलाया जाएगा।
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने बताया कि वैश्विक स्तर पर टीबी के 95 फीसदी मामलों को 2035 का खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन भारत इस लक्ष्य को वर्ष 2025 तक पाना चाहता है। इसके लिए तेजी से काम किया जाएगा।