जैश ए मोहम्मद के बालाकोट स्थित आतंकी कैंप पर भारतीय वायुसेना के सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तान और जैश को हैरान कर दिया। इतनी जल्द पलटवार की उम्मीद इन्हें नहीं थी। पुलवामा हमले के ठीक 12 दिन बाद ही भारत ने 40 जवानों की शहादत का बदला ले लिया। आपको बताते हैं इस आतंकी कैंप की पूरी कहानी।
- सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बालाकोट स्थित जैश के मोहम्मद का आतंकी कैंप पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य में कुनहर नदी के किनारे बनाया गया था। इसे आतंकियों की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, ट्रेनिंग का काम पाक सेना के रिटायर्ड फौजी होते थे।
- न तो पाकिस्तान की एजेंसियों को और न ही जैश को ऐसे किसी हमले का अंदाजा था। पुलवामा हमले के बाद आतंकी कैंपों को बालाकोट के 5 स्टार कैंपों में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। 350 आतंकी नींद में ही ढेर हो गए।
- बालाकोट कैंप का मुखिया युसूफ अजहर की सीबीआई को आईसी-814 हाइजैकिंग मामले में तलाश है। उसके खिलाफ साल 2000 में रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका है। वह जैश ए मोहम्मद के मुखिया मसूद अजह का साला है।
- बालाकोट कैंप जैश और दूसरे आतंकी संगठनों के लिए महत्वपूर्ण आतंकी कैंप रहा है और यहां से कई आतंकियों को ट्रेनिंग देकर आगे भेजा गया है। इस कैंप में 500 से 700 लोगों को रखा जा सकता है। यहां स्वीमिंग पूल, रसोइए की भी सुविधा है।
- यह कैंप बालाकोट शहर से करीब 20 किमी. दूर है और इसका इस्तेमाल आतंकियों को सख्त ट्रेनिंग देने में किया जाता है। ट्रेनिंग देने का काम पाकिस्तान सेना के रिटायर्ड अधिकारी करते हैं। मसूद अजहर और दूसरे आतंकी सरगना यहां अकसर भारत विरोधी उकसाने वाले भाषण दिया करते हैं।
- बालाकोट शहर लाइन ऑफ कंट्रोल के पास एबोटाबाद से 80 किमी. दूर है। एबोटाबाद में ही अमेरिकी सेना ने अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान की नजरों से बचते हुए ढेर किया था।
- इस कैंप का इस्तेमाल मसूद अजहर के रिश्तेदारों और काडर को अत्याधुनिक हथियारों के साथ ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है।
- सूत्र बताते हैं कि जैश के आने से पहले इस कैंप का इस्तेमाल हिजबुल मुजाहिदीन किया करता था।
- बालाकोट कैंप में आतंकियों को दौर ए खास ट्रेनिंग दी जाती थी जहां आतंकी आधुनिक हथियारों, विस्फोटकों के साथ सुरक्षाबलों के काफिले पर हमले के तरीके सीखते थे। इसके अलावा इन्हें आईईडी बनाना, सुसाइड बम तैयार करना, विपरीत हालात में टिके रहने जैसी ट्रेनिंग दी जाती थी।