शनिवार को क्राइम ब्रांच की टीम ने दो दुकानदारों को नकली सॉफ्टवेयर औऱ गैरअधिकृत बायोमैट्रिक डाटा की मदद से लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी अनाज के साथ हेरफेर करने के मामले में गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच के सहायक आयुक्त, आर सर्वैय्या ने कहा- दोनों आरोपी एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे जिसमें लाभार्थियों के कार्ड नंबर, आधार नंबर और उनकी अंगुलियों का बायोमैट्रिक डाटा मौजूद था। इन डिटेल्स के आधार पर वो फर्जी अनाज की बिक्री किया करते थे। हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि आरोपी ने इस सॉफ्टवेयर को कहां से खरीदा, किसने इसे बनाया और कौन उन्हें डाटा मुहैया करवाता था।
सूरत पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा ने कहा कुछ एजेंसियों को सरकार ने बायोमैट्रिक डाटा उपलब्ध करवाया था ताकि वो उसे राशन कार्ड से लिंक कर सकें। इस बात की पूरी संभावना है कि उन एजेंसियों में से किसी ने उस डाटा को सेव कर लिया होगा और बाद में गैरकानूनी तरीके से बेच दिया हो। हालांकि शर्मा का कहना है कि आधार से यह डाटा नहीं चुराया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सॉफ्टवेयर जिसमें बहुत सारे लाभार्थियों की जानकारी मौजूद है, यह डाटा 15,000 रुपए में उपलब्ध है। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा रैकेट है। आरोपियों के नाम बाबूलाल छोगाजी बोरिवल (53) और संपतलाल रोडीलाल शाह (61) के खिलाफ धारा 406, 409 (विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 467, 468, 471 (धोखाधड़ी) के साथ ही आईटी एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है।