राकांपा (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कांग्रेस में अपनी पार्टी के विलय की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दोनों दलों के बीच ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं बदला गया है और वे महा विकास अघाड़ी के सहयोगी के रूप में साथ बने रहेंगे। यह स्पष्टीकरण पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने मूल दलों को कांग्रेस में लौटने की अपील की थी।
महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के संभावित विलय की चर्चाओं पर आखिरकार विराम लग गया है। राकांपा की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस में पार्टी के विलय को लेकर न कोई प्रस्ताव आया है और न ही इस विषय पर कभी कोई चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों दल महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी हैं और पहले की तरह मिलकर काम करते रहेंगे।
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क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
सुप्रिया सुले ने कहा कि कांग्रेस और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के बीच केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और वैचारिक रिश्ते भी मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस नेतृत्व के साथ नियमित संवाद होता है। संसद से लेकर संयुक्त संसदीय समितियों (जेपीसी) तक दोनों दल कई मुद्दों पर साझा रणनीति बनाकर काम करते हैं।
विलय की चर्चा आखिर क्यों शुरू हुई?
दरअसल, यह पूरा विवाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान के बाद शुरू हुआ। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस से अलग होकर बने क्षेत्रीय दलों को मूल पार्टी में लौटने पर विचार करना चाहिए ताकि वैचारिक विरोधियों के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी जा सके। इसके बाद शरद पवार की पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलें तेज हो गई थीं। अब सुप्रिया सुले ने उन सभी चर्चाओं को खारिज कर दिया है।
राकांपा की पृष्ठभूमि क्या?
शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई थी। जुलाई 2023 में पार्टी दो हिस्सों में बंट गई, जब अजीत पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए। चुनाव आयोग ने अजीत पवार गुट को असली एनसीपी और 'घड़ी' चुनाव चिह्न दिया, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)' नाम मिला।