सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी भगवान श्री गणेश की मूर्तियों की बिक्री की अनुमति देने से मना करने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से सोमवार को इन्कार कर दिया। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए पीओपी का उपयोग करके बनाई गई भगवान गणेश की मूर्तियों की बिक्री की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी।
सीजेआई की पीठ के समक्ष सोमवार सुबह वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने इस मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। दीवान ने पीठ को बताया कराया कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने माना था कि मूर्तियों के निर्माण पर रोक नहीं लगाई जा सकती है और प्रतिबंध सिर्फ पीओपी से बनी मूर्तियों के विसर्जन पर है। लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी। जिसके बाद पीठ याचिका पर सोमवार को ही सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई।
सुनवाई के दौरान श्याम दीवान ने कहा कि याचिकाकर्ता एक कारीगर है जो वर्षों से मूर्तियां बना रहा है। शुक्रवार को पुलिस ने मूर्तियों की बिक्री पर रोक लगा दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की मदुरै पीठ का दरवाजा खटखटाया। एकलपीठ ने शनिवार को विशेष सुनवाई कर कहा कि ऐसी मूर्तियों की बिक्री नहीं रोकी जा सकती है और केवल जलाशयों में उनके विसर्जन को रोका जा सकता है। एकलपीठ के इस फैसले पर रविवार को खंडपीठ ने विशेष सुनवाई करते हुए रोक लगा दी। दीवान ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइन सिर्फ विसर्जन को लेकर है।
वहीं तमिलनाडु के एडिशनल एडवोकेट जनरल अमित आनंद तिवारी ने कहा कि सीपीसीबी दिशा-निर्देशों ने पीओपी की मूर्तियों के निर्माण पर भी रोक लगा दी है और दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी मूर्तियों को भी निजी पानी के टैंकों में विसर्जित किया जाना चाहिए न कि सार्वजनिक जलाशयों में। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी और दीवान से कहा कि आप प्राकृतिक मिट्टी का उपयोग कर सकते हैं।