जम्मू में कैम्प में रखे गए करीब 150 से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार भेजा जाना चाहिए या नहीं, सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को इस मसले पर आदेश पारित करेगा। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ बृहस्पतिवार को उस याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी जिसमें जम्मू में कैम्प में रखे गए करीब 150 से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को रिलीज करने की मांग की गई है। याचिका सलीमुल्लाह नामक शख्स ने दायर की है।
सलीमुल्लाह की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की जान को खतरा है। ऐसे में इन लोगों को वहां डिपोर्ट करना मानव अधिकार का उल्लंघन है। भूषण में कहा था कि म्यामार में अभी स्थिति खराब है। म्यामार में सेना, रोहिंग्या बच्चे को मार रहे हैं और यौन प्रताड़ना हो रही है। जम्मू में हिरासत में लिए गए लोगों के पास रिफ्यूजी कार्ड है और उन्हें सरकार डिपोर्ट करने वाली है।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि भारत, अवैध घुसपैठियों की राजधानी नहीं बन सकता। सरकार का कहना था कि रोहिंग्या पूरी तरह से अवैध घुसपैठिएं हैं और ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। गत 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।