चर्च द्वारा तलाक को मंजूरी इंडियन कॉमन लॉ के तहत वैध माना जाए या नहीं, इस पर दाखिल जनहित याचिका पर तेजी से सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अटॉर्नी जनरल और याचिकाकर्ता क्लेरेंस पाइस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सोली सोराबजी की उस अंतरिम आवेदन को स्वीकार कर लिया है, जिसमें इस मामले में जल्द सुनवाई की गुहार लगाई गई थी।
याचिकाकर्ता कर्नाटक के कैथोलिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। याचिका में कहा गया है कि जैसे इस्लाम में तीन तलाक को मान्यता है तो क्रिश्चियन लॉ के तहत किए जाने वाले निर्णयों को भी वैध माना जाए।
याचिका में कहा गया है कि कई कैथोलिक दंपति क्रिश्चियन कोर्ट से तलाक का आदेश लेते हैं, उसके बाद जब वे दोबारा शादी करते हैं तो उन पर बहुविवाह का मुकदमा चलता है। क्रिश्चियन कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक को आपराधिक और दीवानी अदालतें मान्यता नहीं दे रही हैं।