मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट यहां सभी चीजों को ठीक करने के लिए नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का परीक्षण करने का फैसला किया कि क्या किसी महिला को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के तहत दुष्कर्म के मामले में आरोपी बनाया जा सकता है। जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने इस बात पर संदेह व्यक्त किया कि क्या किसी महिला पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया जा सकता है। पीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि उसके अनुसार केवल एक पुरुष पर ही दुष्कर्म का आरोप लगाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत 61 वर्षीय विधवा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि उसे उसके बेटे के खिलाफ दायर झूठे दुष्कर्म मामले में फंसाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि महिला पर कभी भी दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रिया पटेल मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में एक महिला को एकसमान इरादे साझा करने वाला नहीं कहा जा सकता क्योंकि महिलाओं को दुष्कर्म की परिभाषा से बाहर रखा गया है। शीर्ष अदालत ने महिला की याचिका पर नोटिस जारी किया और उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने का भी आदेश दिया।