फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा- ओडिशा और झारखंड के अफसर भी कर सकते हैं तैनात; EC देगा खर्च

Tue, 24 Feb 2026 11:19 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court On Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल एसआईआर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जज तैनात करने की अनुमति दी है। अदालत ने माना कि 294 जज भी दावों के निपटारे के लिए पर्याप्त नहीं हैं और 80 दिन लग सकते हैं। चुनाव आयोग को 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की मंजूरी दी गई है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सबसे जरूरी है। समय कम है और काम बहुत बड़ा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जज तैनात करने की अनुमति दे दी है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तीन साल से अधिक अनुभव वाले सिविल जज, चाहे वे सीनियर डिवीजन के हों या जूनियर डिवीजन के, एसआईआर प्रक्रिया में लगा सकते हैं। यदि इसके बाद भी मानव संसाधन की कमी हो तो झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा सकती है। अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा है।
 
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने क्या बताया?
सुनवाई के दौरान बताया गया कि अब तक 294 जिला और अतिरिक्त जिला जज एसआईआर के अंतिम चरण में तैनात किए गए हैं। इसके बावजूद यह संख्या पर्याप्त नहीं मानी गई। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि यदि एक जज रोज 250 मामलों की सुनवाई करे तो भी पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 80 दिन लग सकते हैं। जबकि अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होनी है। इसलिए समय की भारी कमी है।
विज्ञापन




सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को ये निर्देश दिए
  • मुख्य न्यायाधीश अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर और जूनियर डिवीजन) तैनात कर सकते हैं, जिनके पास कम से कम तीन साल का अनुभव हो।
  • पहले से तैनात जिला और अतिरिक्त जिला जजों के अलावा जरूरत के अनुसार और न्यायिक अधिकारी लगाए जा सकते हैं।
  • यदि राज्य में उपलब्ध जज पर्याप्त न हों तो झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद मांगी जा सकती है।
  • झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा गया है।
  • तैनात न्यायिक अधिकारी एसआईआर प्रक्रिया में आए दावों और आपत्तियों की निगरानी और सत्यापन में मदद करेंगे।
  • पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

ये भी पढ़ें- तमिलनाडु की सियासत: PM ने जयललिता को किया याद; पूर्व AIADMK नेता शशिकला बोलीं- अम्मा के जन्मदिन मिलेगी खुशखबरी



50 लाख से ज्यादा मामलों में गड़बड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि यह आपात सुनवाई इसलिए की गई क्योंकि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पत्र लिखकर प्रक्रिया की विशालता और जटिलता की ओर ध्यान दिलाया था। उनके अनुसार 50 लाख से अधिक मामलों में तार्किक विसंगतियां और अनमैप्ड प्रविष्टियां पाई गई हैं। यह एक बहुत बड़ा अभ्यास है, जिसे कम समय में पूरा करना चुनौती है।
विज्ञापन


28 फरवरी को अंतिम सूची
अदालत ने चुनाव आयोग को 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है। साथ ही कहा है कि नामांकन की अंतिम तारीख तक पूरक सूची जारी की जा सकती है। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत ने आदेश दिया कि पूरक सूची में शामिल मतदाताओं को भी अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा। सत्यापन के दौरान आधार कार्ड, कक्षा 10 की प्रवेश पत्र और पास प्रमाण पत्र को मान्य दस्तावेज माना जाएगा। ईआरओ और एईआरओ को न्यायिक अधिकारियों के साथ सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।

भरोसे के संकट पर भी की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की कमी के कारण गतिरोध की स्थिति बन गई है। इसी कारण न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों की चिंताओं को संतुलित करते हुए चुनाव की शुचिता सुनिश्चित की जाएगी।

अन्य वीडियो-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें