सुप्रीम कोर्ट ने बेहिसाब संपत्ति जुटा रहे राजनेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से कई तीखे सवाल किए।
इस दौरान शीर्ष अदालत ने राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यवसायियों और अपराधियों के बीच सांठगांठ पर वोहरा कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं किए जाने का भी मामला उठाया।
जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने मंगलवार को पूछा कि वोहरा कमेटी की रिपोर्ट का क्या हुआ, जिसमें राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यवसायियों और अपराधियों के बीच सांठगांठ पर तीखी टिप्पणी की गई थी। उसके बाद क्या हुआ? क्या अब वह समय नहीं आ गया है जब हमें उस पर अमल कर देना चाहिए?
सांसदों और विधायकों की संपत्तियों में तेजी से वृद्धि पर सीबीडीटी के हलफनामे में दी गई जानकारी पर संतोष जताते हुए पीठ ने पूछा कि सीबीडीटी क्यों सिर्फ आयकर कानून के दायरे में जांच कर रही है। उसे तो इसकी भी जांच करनी चाहिए कि सांसदों और विधायकों की दौलत में इजाफे के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार हैं।
आय के ज्ञात स्रोतों से ज्यादा आमदनी के मामलों में जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई में ढील बरतने पर पीठ ने केंद्र सरकार की भी खिंचाई की।