सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र को निर्देश दिया। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ चार लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई हैं। इन्हें छह महीने के भीतर पूरा करना होगा। ठाकुर, 1992 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी थे। उन्हें 23 मार्च, 2021 को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की थी। कई विभागीय जांचों के बाद उन्हें "सार्वजनिक हित में अनुपयुक्त" पाया गया था। अन्यथा, वह 2028 तक सेवा में रहते। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने यह निर्देश दिया। राज्य सरकार की वकील रुचिरा गोयल ने बताया कि ठाकुर के खिलाफ चार अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हैं।
बकाया पैसे समेत पुराने विवाद
ठाकुर ने आरोप लगाया कि कार्रवाई 10 साल से खींची जा रही है। उनके 10 लाख रुपये के ग्रेच्युटी फंड सहित सेवानिवृत्ति के बकाया अभी तक नहीं मिले हैं। उन्होंने पीठ से कार्रवाई तीन महीने में पूरी करने का आग्रह किया था, लेकिन पीठ ने छह महीने का समय दिया। ठाकुर की सेवा लगातार सरकारों के साथ विवादों से भरी रही। 2015 में, उन्हें समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव के कथित धमकी भरे फोन कॉल की रिकॉर्डिंग जारी करने पर निलंबित किया गया था।
पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित सीबीएसई छात्रों के लिए नीति बनाने पर हो रहा विचार, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
पश्चिम एशिया संकट के कारण प्रभावित सीबीएसई छात्रों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार नई नीति बनाने पर विचार कर रही है। केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह ऐसे छात्रों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए व्यापक स्तर पर नीति तैयार करने की प्रक्रिया में है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 22 जून तक के लिए स्थगित कर दी।
जस्टिस एजी मसीह की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह केवल एक छात्र का मामला नहीं है बल्कि कई छात्र समान स्थितियों का सामना कर रहे हैं। मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार इस विषय पर नीति बनाने की संभावना पर विचार कर रही है और जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। अदालत सऊदी अरब के अल जुबैल में रहने वाले छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पटेल ने सीबीएसई द्वारा 12वीं क्लास सुधार परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किए जाने को चुनौती दी है।
छात्र ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी, गणित और कंप्यूटर विज्ञान विषयों में परीक्षा दी थी। याचिका में कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और सुरक्षा कारणों से सीबीएसई ने कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। इसके बाद बोर्ड ने 27 मार्च को एक मूल्यांकन योजना जारी की थी, जिसके तहत त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर परिणाम घोषित करने का प्रावधान किया गया था। जरूरत पड़ने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने की भी व्यवस्था की गई थी।
हालांकि 13 मई को परिणाम घोषित होने के बावजूद पटेल का परिणाम आरएल (परिणाम बाद में) दिखाया गया। छात्र का कहना है कि उसने कई बार सीबीएसई अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन अब तक परिणाम घोषित नहीं किया गया। इससे उसका उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रभावित हो रहा है। उसने धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवेदन किया है लेकिन परिणाम न होने के कारण उसकी प्रवेश प्रक्रिया अटक गई है।