धरोहर इमारतों के संरक्षण के लिए डीपीआर तैयार करेगा MCC
मैसूरु सिटी कॉरपोरेशन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने 100 साल से अधिक पुराने देवराजा मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का प्रस्ताव पारित किया है। 1880 के दशक में तत्कालीन मैसूर महाराजा के शासनकाल में बने इन दोनों ऐतिहासिक ढांचों को गिराने या दोबारा बनाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कॉरपोरेशन के इस फैसले को रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया। अदालत ने इस निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और इतिहास के लिए जाना जाता है, इसलिए जहां तक संभव हो, ऐसे धरोहर स्थलों का संरक्षण किया जाना चाहिए।
IIT रुड़की की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे संरक्षण के निर्देश
इससे पहले 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोनों संरचनाओं के संरक्षण और आवश्यक मरम्मत के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि देवराजा मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण संरक्षित किए जाने योग्य हैं तथा वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन कर संरक्षण योजना लागू की जानी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, कई जर्जर हिस्सों का पुनर्निर्माण भी करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मैसूरु सिटी कॉरपोरेशन और मैसूरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी को व्यापक संरक्षण योजना तैयार करने और भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट की सिफारिशों पर भी विचार करने को कहा था।