सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों को 42 फीसदी आरक्षण देने के तेलंगाना सरकार के आदेश को चुनौती वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर अर्जी पर सुनवाई में अनिच्छा दिखाने के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली। शीर्ष अदालत ने हालांकि उन्हें हाईकोर्ट जाने की छूट दी।
वित्तीय संपत्तियों के लिए केंद्रीकृत पोर्टल बनाने की मांग पर आरबीआई से मांगा जवाब
एक अन्य अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें विभिन्न संस्थाओं में मौजूद सभी वित्तीय परिसंपत्तियों की व्यापक सूची तक पहुंचने के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल स्थापित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए आरबीआई, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर उनके जवाब मांगे हैं। साथ ही मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि यह मामला छोटे निवेशकों या जमाकर्ताओं से जुड़ा है। वकील ने कहा, आज की तारीख में यह 3.5 लाख करोड़ रुपये का मामला है। उन्होंने कहा कि यह राशि उनके असली निवेशकों को वापस नहीं की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले हाईकोर्ट का रुख किया था। वकील ने आगे कहा, उच्च न्यायालय ने कहा कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन इसे अधिकारियों को देखना है और इसमें किसी भी तरह का न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है।