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Supreme Court Updates: सुपरटेक रियल्टर्स को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; वैश्विक अयप्पा संगम के खिलाफ याचिका खारिज

Wed, 17 Sep 2025 07:23 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court - फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुपरटेक रियल्टर्स और उसके निलंबित निदेशक राम किशोर अरोड़ा को सख्त आदेश देते हुए कहा कि वे नोएडा के सेक्टर-94 में बन रहे महत्वाकांक्षी 'सुपरनोवा' प्रोजेक्ट में किसी भी तरह के तीसरे पक्ष के अधिकार नहीं बना सकते। यह प्रोजेक्ट 80 मंजिला इमारत के साथ दिल्ली-एनसीआर की सबसे ऊंची इमारत मानी जा रही है, जिसकी ऊंचाई 300 मीटर है। सुपरटेक रियल्टर्स, रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड की सहायक कंपनी है, जो फिलहाल दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरोड़ा को इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) के साथ पूरा सहयोग करना होगा और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
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सुनवाई के दौरान फ्लैट खरीदारों के संगठन ने चिंता जताई कि कंपनी कुछ संपत्तियां बेच सकती है। कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को भी मामले में पक्षकार बनाया। अमीकस क्यूरी (न्यायालय सहयोगी) राजीव जैन ने सुझाव दिया कि इस प्रोजेक्ट को अमरापाली और यूनिटेक की तर्ज पर कोर्ट मॉनिटरिंग में पूरा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 अक्तूबर को तय की है। यह प्रोजेक्ट लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है और हजारों घर खरीदारों का पैसा इसमें फंसा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने वैश्विक अयप्पा संगम के खिलाफ याचिकाएं खारिज कीं
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरल हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें 20 सितंबर को नदी पंपा के किनारे होने वाले वैश्विक अयप्पा संगम के आयोजन की अनुमति दी गई थी। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए. एस. चंदुरकर की बेंच ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि हाई कोर्ट का आदेश सही है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

हाई कोर्ट ने अपने 11 सितंबर के आदेश में कहा था कि संगम के दौरान नदी पंपा की पवित्रता और स्वच्छता को किसी भी हालत में क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। आयोजन स्थल पर न तो स्थायी और न ही अस्थायी संरचनाएं बनाई जाएंगी। इसके अलावा, हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस दौरान प्लास्टिक और नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे का इस्तेमाल सख्त रूप से प्रतिबंधित होगा और तुरंत सफाई की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि यह कार्यक्रम धार्मिक रंग देकर एक राजनीतिक आयोजन किया जा रहा है। जबकि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने कहा कि यह एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक कार्यक्रम है, जो परंपराओं को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और विदेशी अतिथि शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आम श्रद्धालुओं जैसा ही व्यवहार मिलेगा।
 

सुप्रीम कोर्ट ने IFOS अधिकारी के खिलाफ जांच, भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा चलाने की मंजूरी देने दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपी एक आईएफओएस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया और केंद्र से भ्रष्टाचार के आरोपों में उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने को कहा।

मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि राहुल नाम के अधिकारी को विशेष दर्जा क्यों दिया गया, जबकि यह पता चला था कि सीईसी (केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति) की प्रतिकूल टिप्पणियों के बावजूद उसे विशेष पद दिया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अधिकारियों की ओर से पेश हुए। सुनवाई के दौरान, पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने राहुल को छोड़कर सभी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। 'आज यह सूचित किया जाता है कि राज्य सरकार ने उक्त अधिकारी के विरुद्ध अभियोजन की अनुमति दे दी है। प्रस्तुत है कि जहां तक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत स्वीकृति का प्रश्न है... राज्य सरकार का कहना है कि इसे केंद्र सरकार को भेज दिया गया है।'
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बाघ का शिकार व वन्यजीव तस्करी मामले में केंद्र सरकार और एनटीसीए से मांगा जवाब

 सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और अन्य से जवाब मांगा है। यह याचिका वकील गौरव कुमार बंसल ने दाखिल की है, जिसमें मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बाघ-शिकार और वन्यजीव तस्करी के गंभीर मामले को उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि देश के करीब 30 फीसदी बाघ संरक्षित टाइगर रिजर्व के बाहर रहते हैं और कई समाचार रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर बाघों के शिकार का खुलासा हुआ है। पीठ ने नोटिस जारी करते हुए केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से याचिका पर निर्देश लेने को कहा। याचिका में हालिया घटनाओं और खुलासों का हवाला दिया गया है, जिनमें यह सामने आया कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह व्यवस्थित तरीके से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में बाघों का शिकार कर रहा है। इन बाघों की खाल, हड्डियां और अन्य अंगों की तस्करी राज्य की सीमाओं से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की जा रही है। याचिका में कहा गया है कि कई आरोपियों की गिरफ्तारी, बाघ की खाल और हड्डियों की बरामदगी बताती है कि यह बड़े अपराधी नेटवर्क का हिस्सा है, जो कानून-व्यवस्था और पारिस्थितिक सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है। 
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