पूरे भारत में वाहनों के लिए रंग-कोडेड स्टिकर अनिवार्य बनाने पर विचार-विमर्श
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश भर में वाहनों के लिए होलोग्राम-आधारित रंग-कोडित स्टिकर को अनिवार्य बनाने के लिए मंथन किया। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र मानदंडों के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी जोर दिया। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि वह मोटर वाहन (उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट) आदेश, 2018 में संशोधन करने के लिए केंद्र को निर्देश जारी करेगी।
इस दौरान पीठ ने मामले में केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाली अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि क्या GRAP-4 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू है क्योंकि AQI 480 के करीब पहुंच रहा है। इस पर भाटी ने कहा कि इस बारे में जवाब दाखिल किया जाएगा।
वहीं, वाहनों के लिए होलोग्राम-आधारित रंग-कोडेट स्टिकर से संबंधित मुद्दे पर सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) राज्यों में भी, सभी पुराने वाहनों को तीसरा पंजीकरण चिह्न प्रदान नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में काम बहुत धीमे हो रहा है।
बढ़ते साइबर अपराध पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने देश में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सर्विस को लागू करने के लिए दूर संचार नियाम प्राधिकरण ट्राई को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
यह याचिका बंगलुरू के गौरीशंकर एस ने दाखिल की है। इस याचिका में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और अनचाहे कॉल की समस्या का जिक्र किया गया है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि हम जानते हैं कि साइबर अपराध बड़ा मुद्दा है। केंद्र को जवाब देना चाहिए।
एम एम लॉरेंस की बेटियों की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वरिष्ठ वाम नेता एम एम लॉरेंस की बेटियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को सरकारी अस्पताल के बजाय उन्हें सौंपे जाने का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के 18 दिसंबर, 2024 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
केरल हाईकोर्ट ने दिवंगत नेता की बेटियों आशा लॉरेंस और सुजाता बोबन की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने पिता के पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को सौंपने के एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी।