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SC: चंडीगढ़ महापौर चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट नियुक्त करेगा स्वतंत्र पर्यवेक्षक; वीडियोग्राफी कराने का निर्देश

Mon, 27 Jan 2025 03:06 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

30 जनवरी को होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र पर्यवेक्षक की नियुक्ति करेगा। कोर्ट ने कहा कि पूरा चुनाव पर्यवेक्षक की उपस्थिति में होगा और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन पर्यवेक्षक को मानदेय देगा। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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30 जनवरी को होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र पर्यवेक्षक की नियुक्ति करेगा। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि पूरा चुनाव पर्यवेक्षक की उपस्थिति में होगा और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन पर्यवेक्षक को मानदेय देगा।

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याचिकाकर्ता निवर्तमान मेयर कुलदीप कुमार की ओर से पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने सुझाव दिया कि एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को स्वतंत्र पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। वहीं चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें स्वतंत्र पर्यवेक्षक की नियुक्ति से कोई समस्या नहीं है, लेकिन यह एक मिसाल नहीं बननी चाहिए। ऐसा न हो कि सभी नगर निगम शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दें।

इस पर पीठ ने कहा कि वह केवल प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंतित थी। कोर्ट ने पर्यवेक्षक का नाम लिए बिना आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि पर्यवेक्षक का नाम बाद में घोषित किया जाएगा।
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आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ के मेयर कुलदीप कुमार ने मतदान प्रक्रिया में निष्पक्षता के लिए गुप्त मतदान के बजाय हाथ उठाने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। पीठ ने उनकी अनुरोध खारिज कर दिया और कहा कि वह इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

बता दें कि 30 जनवरी को मेयर चुनाव होने हैं और इसके लिए 25 जनवरी को नॉमिनेशन फाइल होंगे। इससे पहले यह चुनाव 24 जनवरी को होना था, लेकिन आम आदमी पार्टी इसके खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चली गई थी। हाईकोर्ट ने 29 जनवरी के बाद चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद डीसी निशांत कुमार यादव ने 30 जनवरी को चुनाव कराने की नोटिफिकेशन जारी की है।

गुजरात विध्वंस : अवमानना कार्रवाई की याचिका पर तीन हफ्ते बाद सुप्रीम सुनवाई
 सुप्रीम कोर्ट गिर सोमनाथ जिले में बिना पूर्व अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए गुजरात अधिकारियों के खिलाफ अवमानना समेत अन्य याचिकाओं पर तीन हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ के समक्ष आया तो उसने कहा कि मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद गैर-विविध दिन पर की जाएगी। इस मामले में पेश वकीलों में से एक ने कहा कि उन्होंने 1 फरवरी से 3 फरवरी तक उर्स उत्सव आयोजित करने की अनुमति के लिए आवेदन दायर किया है। वकील ने कहा कि वहां सैकड़ों वर्षों से उर्स उत्सव मनाया जाता रहा है। हालांकि उन्होंने 13 जनवरी को पुलिस से अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।  

यौन उत्पीड़न मामले में एफआईआर लीक की जांच वाले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय की छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में एफआईआर लीक होने की विभागीय जांच वाले मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी। जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले में राज्य पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी। पीठ ने 28 दिसंबर 2024 के आदेश में हाईकोर्ट की ओर से पुलिस के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के यौन उत्पीड़न की जांच के लिए तीन महिला आईपीएस अधिकारियों वाली एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन और पीड़िता को तत्काल 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया था।  

1 अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए वाहनों पर भी लगेंगे कलर कोडेड स्टिकर
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईंधन के प्रकार को दर्शाने वाले रंग-कोडित स्टिकर लगाने का उसका निर्देश 1 अप्रैल, 2019 से पहले खरीदे गए और एनसीआर राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होगा। जस्टिस अभयएस ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने एनसीआर क्षेत्र में 1 अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए सभी वाहनों को शामिल करने के अपने 13 अगस्त 2018 के आदेश को संशोधित किया। पीठ ने कहा, यह आदेश एनसीआर क्षेत्र के सभी वाहनों के लिए लागू था और इसका कार्यान्वयन 2 अक्तूबर 2018 तक किया जाना था। हम 13 अगस्त, 2018 के आदेश को संशोधित करते हैं। निर्देश देते हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले बेचे गए वाहनों पर उक्त आदेश के प्रावधान लागू होंगे। 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद बेचे गए वाहनों के मामले में जो आदेश के प्रावधानों का पालन नहीं करने वालों पर एमवी अधिनियम, 1988 की धारा 192 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पीठ ने कहा कि उसके आदेश के अनुसार होलोग्राम आधारित हल्के नीले रंग के स्टिकर पेट्रोल और सीएनजी ईंधन से चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि डीजल से चलने वाले वाहनों पर नारंगी रंग का स्टिकर लगाया जाएगा।  
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विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए धारा 144 लगाना गलत संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए अथॉरिटी की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के बार-बार इस्तेमाल पर सवाल उठाया।

शीर्ष कोर्ट ने कहा, एक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है कि चूंकि विरोध प्रदर्शन हो रहा है, इसलिए धारा 144 लगाया जाए। इससे गलत संदेश जाएगा। कोई प्रदर्शन करना चाहता है, तो निषेधाज्ञा की जरूरत क्या है? यह सब इसलिए होता है क्योंकि 144 का दुरुपयोग किया जा रहा है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने झारखंड सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सार्वजनिक प्रदर्शन रोकने के लिए धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी करने की अथॉरिटी की प्रवृत्ति पर यह टिप्पणी की। पीठ झारखंड सरकार की ओर से हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सांसद निशिकांत दुबे समेत भाजपा के अन्य नेताओं के खिलाफ दंगा मामला रद्द करने का फैसला सुनाया गया था।

झारखंड सरकार के वकील ने तर्क दिया कि पत्रकार, पुलिसकर्मी चोटिल हुए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि उन्हें प्रदर्शन करने का अधिकार है।
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