सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को चंडीगढ़ में होने वाले महापौर चुनाव के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जयश्री ठाकुर को स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। जानकारी के मुताबिक, महापौर चुनाव की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन पर्यवेक्षक को मानदेय देगा।
विज्ञापन
इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की तरफ से अपनाए गए 'परस्पर सहमत रुख' का उल्लेख किया और कहा, 'हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जयश्री ठाकुर को स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करना उचित समझते हैं।' शीर्ष अदालत ने चुनाव की कार्यवाही पर्यवेक्षक की भौतिक उपस्थिति में संचालित करने का निर्देश दिया और आदेश दिया कि इसकी विधिवत वीडियोग्राफी की जानी चाहिए।
पीठ ने मेयर चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी को स्वतंत्र पर्यवेक्षक से संपर्क करने और निर्धारित चुनाव तिथि से पहले पूर्व न्यायाधीश के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया। पीठ ने आदेश दिया, 'पर्यवेक्षक को एक लाख रुपये का मानदेय दिया जाएगा, जिसका भुगतान चंडीगढ़ के केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की तरफ से एक सप्ताह के भीतर किया जाएगा। सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।'
विज्ञापन
पंजाब के मौजूदा मेयर कुलदीप कुमार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज को स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किया जा सकता है। चंडीगढ़ प्रशासन का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्वतंत्र पर्यवेक्षक की नियुक्ति पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन कहा कि यह एक मिसाल नहीं बननी चाहिए, जहां सभी नगर निगम सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने लगें। पीठ ने कहा कि वह केवल प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंतित है, जबकि उसने दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज कीं।
चंडीगढ़ के मेयर कुलदीप कुमार ने आप से चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए 'गुप्त मतदान' के बजाय 'हाथ उठाकर मतदान' करने की मांग करते हुए याचिका दायर की। हालांकि पीठ ने अनुरोध को खारिज कर दिया और कहा कि वह इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण में हस्तक्षेप नहीं करेगी। पिछले साल 20 फरवरी को, शीर्ष अदालत ने आप-कांग्रेस गठबंधन के पराजित उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विवादास्पद चुनाव के परिणाम को पलटते हुए यूटी का मेयर घोषित किया, जिसमें भाजपा उम्मीदवार अप्रत्याशित रूप से विजेता बनकर उभरा था।
उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ पर सुनवाई से 'सुप्रीम' इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ सितंबर 2023 में उनकी विवादास्पद 'सनातन धर्म को खत्म करो' टिप्पणी के लिए आपराधिक कार्रवाई की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया। उदयनिधि स्टालिन पहले से ही अपनी टिप्पणी के लिए अपने खिलाफ दर्ज कई एफआईआर का सामना कर रहे हैं।
यौन उत्पीड़न मामला: सुप्रीम कोर्ट ने FIR लीक की जांच के मद्रास HC के निर्देश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु सरकार को चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय की एक छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न मामले में एफआईआर लीक की विभागीय जांच करने के लिए कहा गया था। जस्टिस बीवी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले में राज्य पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी।
पीठ ने 28 दिसंबर 2024 के अपने आदेश में हाईकोर्ट द्वारा पुलिस के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न की जांच के लिए तीन महिला आईपीएस अधिकारियों वाली एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है, 'तमिलनाडु सरकार को पीड़ित लड़की को तत्काल 25,00,000 रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया जाता है, क्योंकि पुलिस विभाग ने एफआईआर लीक करने में चूक की और पीड़ित लड़की और उसके परिवार के सदस्यों को जो मानसिक आघात पहुंचा, उसके लिए यह कदम उठाया गया है।' एफआईआर लीक होने की विभागीय जांच करने के निर्देश के अलावा, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा कि वह चूक के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करे।
SC ने याचिकाकर्ता से दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों के ठिकाने के बारे में पूछा
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) से पूछा कि क्या रोहिंग्या शरणार्थी बच्चे राष्ट्रीय राजधानी में अस्थायी शिविरों या नियमित आवासीय कॉलोनियों में रह रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें स्कूलों में रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों के प्रवेश का मुद्दा उठाया गया था। एनजीओ ‘सोशल ज्यूरिस्ट’ ने स्थानीय स्कूलों में उनके नामांकन के लिए याचिका की जांच करने से इनकार करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के पिछले साल अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस पहलू पर केंद्र को विचार करना होगा क्योंकि यह एक नीतिगत निर्णय है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा, 'वे (रोहिंग्या शरणार्थी बच्चे) कहां रह रहे हैं? उनका पता क्या है? उनके राशन कार्ड कहां हैं?' जब पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ऐसे बच्चों को स्कूलों में दाखिला देने का निर्देश देने का अनुरोध कर रहा है, तो एनजीओ के वकील ने कहा कि याचिका केवल रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों के लिए शिक्षा के अवसरों के बारे में है। उन्होंने कहा कि वे नियमित आवासीय कॉलोनियों में रह रहे हैं, न कि अस्थायी शिविरों में। पीठ ने कहा, 'याचिकाकर्ता के वकील ने रोहिंग्या परिवारों के बारे में बेहतर जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है, जिनके बारे में कहा गया है कि वे अस्थायी शिविर के बजाय नियमित आवासीय क्षेत्रों में रह रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।'
1 अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए वाहनों पर भी लगेंगे कलर कोडेड स्टिकर- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईंधन के प्रकार को दर्शाने वाले रंग-कोडित स्टिकर लगाने का उसका निर्देश 1 अप्रैल, 2019 से पहले खरीदे गए और एनसीआर राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होगा। जस्टिस अभयएस ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने एनसीआर क्षेत्र में 1 अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए सभी वाहनों को शामिल करने के अपने 13 अगस्त 2018 के आदेश को संशोधित किया।
पीठ ने कहा, यह आदेश एनसीआर क्षेत्र के सभी वाहनों के लिए लागू था और इसका कार्यान्वयन 2 अक्तूबर 2018 तक किया जाना था। हम 13 अगस्त, 2018 के आदेश को संशोधित करते हैं। निर्देश देते हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले बेचे गए वाहनों पर उक्त आदेश के प्रावधान लागू होंगे। 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद बेचे गए वाहनों के मामले में जो आदेश के प्रावधानों का पालन नहीं करने वालों पर एमवी अधिनियम, 1988 की धारा 192 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पीठ ने कहा कि उसके आदेश के अनुसार होलोग्राम आधारित हल्के नीले रंग के स्टिकर पेट्रोल और सीएनजी ईंधन से चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि डीजल से चलने वाले वाहनों पर नारंगी रंग का स्टिकर लगाया जाएगा।