कोर्ट के आदेश पर पेश न होना एक अलग अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर अगर किसी आरोपी को अदालत में पेश होने का आदेश (प्रोक्लेमेशन) दिया जाए और वह नहीं आता, तो यह एक अलग अपराध माना जाएगा। भले ही आदेश बाद में खत्म हो जाए, तब भी यह अपराध चलता रहेगा। कोर्ट ने दो जनवरी को यह फैसला सुनाया। यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जून 2023 के फैसले से जुड़ा था। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी आरोपी को दोषमुक्त कर दिया जाए, तब भी उसे अदालत में पेश न होने के लिए दोषी ठहाराया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174ए के तहत यह एक अलग अपराध है, जो तब भी जारी रह सकता है, जब उससे जुड़ा आदेश खत्म हो जाए।