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SC Updates: नर्स निमिषा मामले में याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को बड़ी राहत

Fri, 22 Aug 2025 07:38 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बाय यूजर और सभी वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसके अलावा असम पुलिस को पत्रकार व यूट्यूबर सिद्धार्थ वरदराजन समेत अन्य पत्रकारों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के संबंध में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट अहम खबरें...। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट हत्या के मामले में यमन में मौत की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। इस याचिका में निमिषा से संबंधित मामले में व्यक्तियों, संगठनों व अन्य लोगों को असत्यापित सार्वजनिक बयान देने से रोकने के लिए निर्देश देने की अपील की गई है।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार को याचिकाकर्ता से कहा कि वह याचिका की एक प्रति अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी के कार्यालय को सौंपे। पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 25 अगस्त के लिए स्थगित कर दी। व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता केए पॉल ने कहा कि उन्हें प्रिया से एक चौंकाने वाला पत्र मिला था। वह पिछले कई दिन से यमन में थे। पीठ ने पॉल से पूछा, उसकी मां उसकी देखभाल कर रही है, आप चिंतित क्यों हैं? याचिकाकर्ता ने कहा कि पत्र पर प्रिया व उसकी मां के हस्ताक्षर थे।

वक्फ पंजीकरण के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बाय यूजर और सभी वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। केंद्र ने छह जून को सभी वक्फ संपत्तियों की जियो-टैगिंग के बाद डिजिटल सूची बनाने के लिए एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 (यूएमईईडी) केंद्रीय पोर्टल लॉन्च किया था। इस पोर्टल पर पूरे भारत में सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों का विवरण छह महीने के भीतर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाना है।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने इस मामले में पहले ही आदेश सुरक्षित रख लिया है। वकील ने कहा कि समस्या यह है कि समय बीतता जा रहा है और केंद्र ने संपत्तियों के पंजीकरण के लिए छह महीने का समय दिया है। इस पर सीजेआई ने कहा कि आप इसे पंजीकृत कराएं। कोई भी आपको पंजीकरण से मना नहीं कर रहा है। इस पहलू पर बाद में विचार किया जा सकता है।

वहीं 22 मई को मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने वक्फ मामले में तीन प्रमुख मुद्दों पर अंतरिम आदेश सुरक्षित रखा था। इनमें से एक मुद्दा वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 में निर्धारित अदालतों द्वारा वक्फ, उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ या विलेख द्वारा वक्फ के रूप में घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने की शक्ति से संबंधित है।

शुक्रवार को एक वकील ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार ने पोर्टल है पर उपयोगकर्ताओं द्वारा वक्फ सहित सभी वक्फों के अनिवार्य पंजीकरण की बात कही है। आवश्यकताएं ऐसी हैं कि वक्फ-बाय-यूजर्स को पंजीकृत नहीं किया जा सकता। हमने निर्देश के लिए अंतरिम आवेदन दायर करने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री यह कहते हुए इसकी अनुमति नहीं दे रही है कि फैसला पहले ही सुरक्षित रखा जा चुका है।

असम पुलिस को सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को असम पुलिस को पत्रकार व यूट्यूबर सिद्धार्थ वरदराजन समेत अन्य पत्रकारों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के संबंध में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश तब पारित किया जब पत्रकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कहा कि असम पुलिस अदालत द्वारा पारित पूर्व आदेशों की अवहेलना कर रही है। वरदराजन समेत अन्य पत्रकारों को मई में दर्ज एक पुरानी प्राथमिकी में बयान दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को बुलाया गया है और ऐसी आशंका है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

इस पर पीठ ने कहा कि सभी से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है और पत्रकारों से कहा कि वे जांच में शामिल हों तथा अगली सुनवाई पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। 12 अगस्त को शीर्ष अदालत ने वरदराजन को संरक्षण दिया था और ऑपरेशन सिंदूर पर एक लेख को लेकर उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के संबंध में असम पुलिस को उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया था।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ दर्ज मामले में बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें विधायक पर एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) बनाने के निर्देश दिए गए थे। मामला भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज से जुड़ा है, जिस पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर मान्यता लेने का आरोप है। यह कॉलेज अमन एजुकेशन सोसाइटी चलाती है, जिसके सचिव मसूद हैं।

हाई कोर्ट ने कॉलेज की मान्यता रद्द करने के बाद 18 अगस्त को एफआईआर दर्ज करने और SIT बनाने का आदेश दिया था। SIT में एडीजी संजीव शामी, डीआईजी कल्याण चक्रवर्ती और एआईजी प्रशिक्षण निमिषा पांडे शामिल किए गए थे। FIR कोहे-फ़िज़ा थाने में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज़ इस्तेमाल करने जैसी धाराओं में दर्ज हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस आदेश पर रोक लगाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें पश्चिम बंगाल ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन बोर्ड को मेडिकल और एलाइड साइंसेज (पीजी) परीक्षा की मेरिट लिस्ट रद्द कर दोबारा बनाने का निर्देश दिया गया था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था कि बोर्ड ने पुराने आदेश का उल्लंघन किया और नई आरक्षण नीति लागू कर दी, जबकि इस नीति को पहले ही रोका जा चुका था। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि केवल 66 ओबीसी समुदायों (जो 2010 से पहले मान्यता प्राप्त थे) को ही 7% आरक्षण मिले और इसके आधार पर 15 दिनों में नई मेरिट लिस्ट जारी की जाए।

लेकिन शुक्रवार को चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने राज्य सरकार की दलीलें सुनीं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सरकार की ओर से कहा कि हाईकोर्ट का आदेश प्रशासन के लिए दिक्कतें पैदा कर रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की। गौरतलब है कि 22 मई 2024 को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने 2010 के बाद बने ओबीसी-A और ओबीसी-B वर्गीकरण को अवैध ठहराया था और राज्य सरकार द्वारा जारी सभी प्रमाणपत्र भी रद्द कर दिए थे। इसी फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नदी की स्थिति का सही अध्ययन किए बिना रेत खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देना बेहद खतरनाक है और इससे प्रकृति पर गंभीर असर पड़ेगा। अदालत ने साफ किया कि किसी भी जिले में रेत खनन की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब पहले वैज्ञानिक अध्ययन और रिपोर्ट तैयार की जाए।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि आजकल निर्माण कार्यों के लिए रेत की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि यदि ऐसे ही खनन होता रहा तो वर्ष 2050 तक दुनिया में निर्माण योग्य रेत की भारी कमी हो सकती है। अदालत ने बताया कि रेत मुख्य रूप से नदियों से निकाली जाती है। लेकिन बार-बार और बेतरतीब ढंग से रेत निकालने से नदी की तली चौड़ी हो जाती है, किनारे कटने लगते हैं और नदी के आसपास का पूरा पर्यावरण प्रभावित होता है। इससे पानी की धारा बदल सकती है और जीव-जंतुओं व पेड़-पौधों की विविधता कम हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट में 20 फीसदी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री को चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी-20) के राष्ट्रव्यापी बिक्री को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि लाखों वाहन चालकों को ऐसे ईंधन का उपयोग करने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो वाहनों के लिए नहीं बनाया गया है। याचिका वकील अक्षय की ओर से दायर की गई है। याचिका में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सभी ईंधन स्टेशनों पर एथनॉल मुक्त (ई0) पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि 2023 से पहले निर्मित कारें और दोपहिया वाहन, और यहां तक कि कुछ नए बीएस-छह मॉडल भी ऐसे उच्च एथनॉल मिश्रित ईंधन के लिए अनुकूल नहीं हैं।

याचिका में इस कदम के कारण इंजनों को होने वाले नुकसान, माइलेज में कमी और अन्य परिणामों के बारे में बताया गया है। इसमें सभी पेट्रोल पंपों और डिस्पेंसिंग इकाइयों पर एथनॉल की मात्रा का लेबल लगाने का निर्देश देने की भी मांग की गई, ताकि यह उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

मुंबई झुग्गी पुनर्विकास मामले में कोर्ट ने भूस्वामी के अधिकार को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को बरकरार रखा जिसमें झुग्गी पुनर्वास के लिए मुंबई के कुर्ला इलाके में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से किए गए भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया गया था। जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने हाईकोर्ट के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र स्लम क्षेत्र (सुधार, निकासी और पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 के तहत भूस्वामियों को अपनी संपत्ति के पुनर्विकास का अधिमान्य अधिकार प्राप्त है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ ताराबाई नगर को-ऑप हाउसिंग सोसाइटी की याचिका के अलावा महाराष्ट्र सरकार और उसके स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) की अपीलों को खारिज कर दिया।
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जेईईएमएएस की मेरिट सूची फिर से बनाने के आदेश पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 2024-25 के लिए चिकित्सा और संबद्ध विज्ञान (स्नातकोत्तर) के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा की मेरिट सूची को रद्द करने और फिर से तैयार करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीजेईईबी) को यह आदेश दिया थआ। हाईकोर्ट ने कहा कि डब्ल्यूबीजेईईबी ने उसके 22 मई, 2024 के आदेश के अनुरूप आरक्षण नहीं दिया। इसके बाद उसने बोर्ड को मेरिट सूची को नए सिरे से तैयार करने और एक नया पैनल प्रकाशित करने का निर्देश दिया, उसके आदेश के अनुरूप, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग विभाग की ओर से 2010 से पहले मान्यता प्राप्त ओबीसी उम्मीदवारों के 66 वर्गों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए।
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