बॉम्बे हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों की स्थायी नियुक्ति को मंजूरी
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 20 फरवरी को हुई बैठक में कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति शैलेश प्रमोद ब्रह्मे, फिरदौस फिरोज पूनीवाला और जितेंद्र शांतिलाल जैन के नामों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में मंजूरी दी।
कॉलेजियम ने यह भी सिफारिश की कि बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त हाईकोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति मंजूषा अजय देशपांडे का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। जिनके नाम की सिफारिश की गई है, वे हैं- न्यायमूर्ति रामासामी शक्तिवेल, पी धनबल, चिन्नासामी कुमारप्पन और कंडासामी राजशेखर। पटना हाईकोर्ट के लिए न्यायाधीशों के रूप में अधिवक्ता आलोक कुमार सिन्हा, रितेश कुमार, सोनी श्रीवास्तव, सौरेन्द्र पांडेय और अंशुल राज के नामों को मंजूरी दी गई।
सुपरटेक की 16 परियोजनाएं एनबीसीसी को देने के आदेश पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक की करीब 9,500 करोड़ रुपये की 16 आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने का काम सरकारी कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को सौंपने के आदेश पर रोक लगा दी है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने यह आदेश दिया था।
शीर्ष कोर्ट ने सुपरटेक व अन्य इच्छुक कंपनियों से भी कहा है कि वे परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने के बारे में नए सिरे से प्रस्ताव प्रस्तुत करें।
चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार व जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ अपीलों पर शुक्रवार को सुनवाई कर रही थी। पीठ ने घर खरीदारों के लिए चिंता व्यक्त की और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। पीठ ने इस बात की जांच करने पर भी सहमति जताई है कि क्या ट्रिब्यूनल ने एनबीसीसी को नियुक्त करने में दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) प्रक्रिया का पालन किया है। पीठ ने समाधान पेशेवर से कहा है कि वह अपना काम फिर से शुरू करे और एनबीसीसी को कोई काम या िजम्मेदारी न सौंपे। साथ ही मामले की सुनवाई एक अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह में तय कर दी। उधर, सुपरटेक ने दावा किया कि वह बाहरी हस्तक्षेप के बिना परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम है।
मई में शुरू होना था काम
एनसीएलएटी के निर्देश के तहत, एनबीसीसी को 31 मार्च, 2025 तक इन परियोजनाओं के लिए काम देने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था। इसके तहत अगले महीने के भीतर औपचारिक अनुबंध सौंपे जाने थे और मई 2025 तक निर्माण शुरू होना था। एनबीसीसी को परियोजनाएं सौंपने के अलावा एनसीएलएटी ने प्रत्येक परियोजना के लिए एक शीर्ष समिति के गठन का भी निर्देश दिया था। इन समितियों को निर्माण प्रक्रिया की देखरेख करने का काम सौंपा गया था।
49,748 आवासीय इकाइयां अधर में
एनसीएलएटी के आदेश में सुपरटेक की 16 आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एनबीसीसी को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया गया था। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में लगभग 49,748 आवास इकाइयां शामिल हैं। ये परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं और लगभग 27,000 खरीदारों को अपने घर का इंतजार है।