क्लैट 2025 के परिणाम के खिलाफ दायर मामलों को उच्च न्यायालयों से शीर्ष अदालत में भेजने की राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किए। कोर्ट ने कहा कि वह आधिकारिक फैसले के लिए मामलों को एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है। शीर्ष न्यायालय तीन फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में मामलों को हस्तांतरित करने के अनुरोध वालाी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि मामलों को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भेजा जा सकता है।
आज क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) 2025 के परिणामों के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं को किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकता है। दिल्ली और कर्नाटक समेत कई उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें आरोप हैं कि क्लैट, 2025 में कई सवाल गलत थे। विभिन्न उच्च न्यायालयों में विभिन्न पक्षों की ओर से पेश वकीलों को नोटिस जारी करते हुए प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि वह इस विवाद पर आधिकारिक फैसले के लिए मामलों को एक उच्च न्यायालय, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भेजने के पक्ष में है।
पीठ ने कहा, 'विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित रिट याचिकाओं का निस्तारण एक उच्च न्यायालय में होना चाहिए। चूंकि यह शीघ्र होगा, इसलिए नोटिस जारी किए जाएं, जिनके जवाब तीन फरवरी, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में दिए जाएं। विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकीलों को नोटिस दिए जाएंगे। पीठ का विचार है कि मामले को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जा सकता है।'
सीएनएलयू ने दायर की थी याचिका
सीएनएलयू ने अधिवक्ता पृथा श्रीकुमार अय्यर के जरिए याचिका दायर की थी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उसकी ओर से पक्ष रखा। एक अभ्यर्थी ने हाल में दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ को सूचित किया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं लंबित हैं और स्थानांतरण याचिकाएं शीर्ष अदालत के समक्ष दायर की जाएंगी। इसके बाद कोर्ट ने एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 30 जनवरी को सुनवाई करना तय किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था?
इससे पहले 20 दिसंबर, 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने उत्तर कुंजी में त्रुटियों को लेकर क्लैट-2025 के परिणाम को संशोधित करने के लिए संघ को निर्देश दिया था। एकल न्यायाधीश का फैसला क्लैट के एक अभ्यर्थी की याचिका पर आया था। फैसले में कहा गया था कि प्रवेश परीक्षा में दो प्रश्नों के उत्तर गलत थे। याचिका में 7 दिसंबर 2024 को संघ द्वारा प्रकाशित उत्तर कुंजी को चुनौती दी गई थी, जबकि कुछ प्रश्नों के सही उत्तर घोषित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। एकल न्यायाधीश ने कहा था कि त्रुटियां पूरी तरह स्पष्ट थीं और उन पर आंखें मूंद लेना अन्याय के समान होगा।
एक दिसंबर को हुई थी परीक्षा, सात को आए थे परिणाम
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्लैट, 2025 का आयोजन एक दिसंबर को किया गया था और परिणाम की घोषणा सात दिसंबर को की गई थी।